इंसानों ने घर उजाड़ा या शावक मारे! इसी का बदला ले रहे हैं भेड़िये

उत्तर प्रदेश के बहराइच में मार्च से लेकर अब तक भेड़ियों के हमले में 8 लोगों की जान जा चुकी है. जिसमें सात बच्चे हैं. 36 से ज्यादा लोग जख्मी हैं. जिसमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं. पूरा जिला और आसपास का इलाका इस समय भेड़ियों से आतंकित है. लोग डरे हुए हैं. मार्च से हो रहे हमलों में सबसे ज्यादा घटनाएं 17 जुलाई को हुईं. 

बहराइच जिले के कतर्नियाघाट वाइल्डलाइफ डिविजन के पूर्वी वन अधिकारी ज्ञान प्रकाश सिंह ने बताया कि अन्य शिकारी जानवरों की तुलना में भेड़ियों में बदला लेने की प्रवृत्ति बहुत ज्यादा होती है. यह बात मैं अपने अनुभव से कह रहा हूं. भेड़ियों के लगातार हो रहे हमले के पीछे वजह इंसान ही है. किसी न किसी तरह से इंसानों ने भेड़ियों को नुकसान पहुंचाया होगा. या तो उनका घर बर्बाद किया होगा. या उनके बच्चों को मारा होगा. इसी का बदला भेड़िये ले रहे हैं. 

सिंह इस समय वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के सलाहकार हैं. सिंह ने 25 साल पहले जौनपुर और प्रतापगढ़ की घटना का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि उस समय सई नदी के किनारे वाले इलाके में 50 से ज्यादा बच्चों को भेड़ियों ने मारा था. जांच में पता चला था कि उस समय कुछ बच्चों ने भेड़ियों के दो बच्चों को मारा था. जिसके बाद मारे गए शावकों के माता-पिता भेड़ियों ने इंसानों के बच्चों को मारना शुरू कर दिया था.  

वन विभाग के लोगों ने उस समय आदमखोर भेड़ियों को पकड़ने की मुहिम चलाई. कुछ भेड़ियों को पकड़ा. लेकिन दोनों गुस्साए आदमखोर भेड़िये भाग निकले. फिर बड़े पैमाने पर खोजबीन शुरू की गई. इसके बाद उन्हें पहचान कर गोली मार दी गई. ऐसा ही पैटर्न बहराइच में जनवरी-फरवरी में देखने को मिला. ट्रैक्टर के पहियों के नीचे भेड़ियों के दो बच्चे मारे कुचले गए थे. 

बहराइच में जो भेड़िये पकड़े गए उनमें से कुछ को चकिया जंगल में छोड़ा गया है. ये कोई 40 किलोमीटर दूर है. यहां पर गलती की गई है. चकिया जंगल भेड़ियों का प्राकृतिक रहवास नहीं है. वो उनका नेचुरल हैबिटैट नहीं है. हो सकता है कि फिर से वो भेड़िये वापस आ गए हों और बदला लेने के लिए हमला कर रहे हों. 

चार पकड़े गए भेड़ियों को लेकर सिंह ने कहा कि जरूरी नहीं कि सारे आदमखोर भेड़ियों को पकड़ लिया गया हो. क्योंकि कोई एक भी अगर बाहर है तो हमले होते रहेंगे. और जो हाल में हमले हुए वो इसी का नतीजा है. ये भी जरूरी नहीं कि सारे भेड़िये जो पकड़े गए हैं, वो आदमखोर हों.  

बहराइच के डीएफओ अजित प्रताप सिंह ने कहा कि यहां तक कि बाघों और तेंदुओं में भी बदला लेने की आदत नहीं होती है. लेकिन भेड़िये ऐसा करते हैं. अगर उनके रहने के स्थान पर या उनके परिवार या समूह पर किसी तरह की आफत आती है. खासतौर से इंसानों द्वारा तो वे बदला लेते हैं. किसी और जानवर ने अगर ऐसा किया तो भेड़िये उससे भी बदला लेते हैं. 

देवीपाटन के डिविजनल कमिश्नर शशि भूषण लाल ने कहा कि अभी तक आदमखोर भेड़िये पकड़े नहीं गए हैं. उनका हमला जारी है. अंतिम फैसला भेड़ियों को गोली मारने का होगा. देवीपाटन डिविजन में गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती आते हैं.

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