एक महिला और उसके दो नाबालिग बच्चों के लापता होने से शुरू हुई जांच की कहानी एक गंभीर आपराधिक गतिविधि तक पहुंची। दिल्ली पुलिस के शाहदरा जिले की मानव तस्करी रोकथाम इकाई ने तफ्तीश में पाया कि लापता महिला (जोकि अब सामने आ चुकी है) भारत में प्रतिबंधित ई-मेल सेवा का इस्तेमाल कर रही थी। यह महिला गृहिणी है। ऐसे में दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले की जांच गृह मंत्रालय को सौंपी है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति अमित शर्मा की पीठ ने इस मामले में गृह मंत्रालय को जांच के आदेश देते हुए कहा कि यह एक गंभीर मामला है। प्रटोन.मी/प्रटोन मेल एजी, स्विजरलैंड को भारत सरकार की ओर से इसलिए प्रतिबंधित किया गया था क्योंकि इस मेल एड्रेस से गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था। पीठ ने कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है कि प्रतिबंधित मेल साइट होने के बावजूद एक गृहिणी इसे चला रही थी।
पीठ ने इस मामले में संबंधित महिला, उसके कथित प्रेमी और उसके परिवार के खिलाफ दिल्ली पुलिस को कानून के हिसाब से कार्रवाई करने के निर्देश दिया है। दरअसल, यह मामला एक साधारण से कारोबारी परिवार की एक महिला और उसके दो नाबालिग बच्चों के लापता होने से शुरू हुआ था। जांच में पाया गया कि महिला अपने कारोबारी पति के एक कर्मचारी के साथ गई है। वह घर से गहने और नकदी भी लेकर गई थी।
वहीं, जिस कर्मचारी के साथ महिला के जाने की बात कही जा रही थी। उस कर्मचारी की मां ने उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर आशंका जाहिर की थी कि उसके बेटे को उसके मालिक ने बंधक बनाकर रखा हुआ है। हालांकि एक महीने 20 दिन की तफ्तीश में पुलिस ने कई बड़े खुलासे किए। जिससे यह मामला महज लापता होने से बढ़कर राष्ट्रीय सुरक्षा से जा जुड़ा।
महिला और कर्मचारी की मां का झूठ कोर्ट के सामने आया
इस मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय की पीठ के समक्ष पुलिस ने पुख्ता सबूत रखे। जिसके मुताबिक महिला जिस कर्मचारी के साथ घर छोड़कर गई थी, उसी की बहन व जीजा के साथ दरभंगा, बिहार में रह रही थी। वहीं महिला पीठ के समक्ष पेश होकर कहा था कि उसे नहीं पता कि जिस कर्मचारी के लापता होने की बात कही जा रही है वह कहां है। जबकि पुलिस ने रिकॉर्ड पेश कर बताया कि उच्च न्यायालय के समक्ष 15 अक्तूबर को पेशी के समय भी दोनों दूसरों के नाम से ली गई सिम से एक-दूसरे के संपर्क में थे। इतना ही नहीं महिला की निशानदेही पर 16 लाख रुपये मूल्य के जेवरात बरामद किए गए। पीठ ने इन सभी के खिलाफ अदालत को गुमराह करने पर कार्रवाई को भी कहा है।
बच्चों की कस्टडी पिता और दादा-दादी को दी
पीठ ने इस पूरे मामले को देखते हुए दो नाबालिग बच्चों की कस्टडी उनके पिता व दादा-दादी को सौंप दी है। पीठ ने कहा है कि बच्चों की भलाई बहरहाल पिता व संयुक्त दादा-दादी के परिवार के साथ रहने में ही है। महिला पुलिस कांस्टेबल समय-समय पर सादी वर्दी में इनका पता लेती रहेगी। हालांकि पीठ ने मां को भी कहा कि वह चाहे तो संबंधित अदालत में बच्चों की कस्टडी के लिए याचिका दायर कर सकती है।
उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस की प्रशंसा की
दिल्ली उच्च न्यायालय ने शाहदरा जिले की मानव तस्करी रोकथाम इकाई की सराहना की। इस इकाई का नेतृत्व करने वाले इंस्पेक्टर सुरेन्द्र शर्मा की खासतौर पर प्रशंसा करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि उन्होंने बहुत कम समय में निरंतर प्रयास से एक बेहद उलझे मामले को सुलझा कर उच्च न्यायालय पर आई नाबालिगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी को बाखूबी निभाया है।