हन्मुंबई महानगरपालिका चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने अलग रणनीति अपनाई है। पार्टी की जारी की गई 137 उम्मीदवारों की सूची पर नजर डालें तो साफ दिखता है कि बीजेपी ने इस बार महिला नेतृत्व को खास तरजीह दी है।
सूची के अनुसार 76 महिला और 61 पुरुष उम्मीदवार मैदान में उतारे गए हैं। यह मुंबई के किसी भी सिविक चुनाव में बीजेपी की ओर से महिलाओं का अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधित्व माना जा रहा है।
बीएमसी चुनावों में वैसे तो 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होती हैं, लेकिन बीजेपी ने इस अनिवार्यता से आगे बढ़ते हुए ओपन वा में भी महिलाओं को टिकट दिया है।
- एनसीपी के 94 उम्मीदवारों में 52 महिलाएं: इसी तरह राज्य सरकार में महायुती की सहयोगी एनसीपी के प्रमुख उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने भी महिलाओं की आरक्षित 50 फीसदी से अधिक जगह दी है।
- एनसीपी के 94 उम्मीदवारों में 52 महिलाएं हैं, जो बीएमसी के माध्यम से मुंबइकर्स की सेवा करना चाहती हैं। अब तक यह परंपरा रही है कि आमतौर पर महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर ही महिलाओं को टिकट दिया जाता रहा है, लेकिन भाजपा जिस तरह से महिला उम्मीदवारों को प्रमोट कर रही है।
उससे राजनीतिक हलकों में हैरानी जताई जा रही है। कई टीकाकारों का मानना है कि भाजपा की नज़र 2029 का लोकसभा और विधान सभा चुनाव है। जब 33 फ़ीसदी आरक्षण लागू होगा। इसीलिए महिलाओं को ज्यादा मौका दिया जा रहा है।
महिला उम्मीदवारों पर जताया है भरोसा
- खासकर ऐसे कार्यकर्ताओं के बीच जो ओबीसी या एसटी जैसे आरक्षण श्रेणियों में नहीं आते। इसके बावजूद पार्टी ने जीत की संभावना को प्राथमिकता देते हुए महिला उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है।
- वार्ड नंबर 57, गोरेगांव इसका एक प्रमुख उदाहरण है। यह एक ऑपन सीट है, जहां से बीजेपी ने एक बार फिर पूर्व नगरसेविका श्रीकला पिल्ले को मैदान में उत्तारा है।
- श्रीकला के पिता रामचंद्रन पिल्ले काग्रेस से पांच बार नगरसेवक रहे। 2010 में उनके निधन के बाद श्रीकला ने 2017 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा, जीत हासिल की और इस बार फिर पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है।
- बीजेपी नेतृत्व का कहना है कि महिला उम्मीदवारों को ओपन वा से उतारने का फैसला स्थानीय जनभावना और जीत की संभावना को देखते हुए लिया गया है।
व्यक्तिगत जुड़ाव सबसे अहम
- पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार, अगर कोई महिला उम्मीदवार जीतने की सबसे मजबूत स्थिति में है, तो सीट की कैटेगरी मायने नहीं रखती। ऐसे ही अन्य उदाहरणों में वार्ड 55 (कांदिवली) से मराठी फिल्म अभिनेत्री निशा परूलेकर, वार्ड 98 (खार) से पूर्व उपमहापौर अलका केरकर, और वार्ड 225 (फोर्ट-कोलाबा) से हर्षिता नरवेकर को ओपन सीट से उम्मीदवार बनाया गया है।
- हर्षिता नरवेकर का कहना है कि नगर निगम चुनावों में उम्मीदवार का पुरुष या महिला होना नहीं, बल्कि वोटर से व्यक्तिगत जुड़ाय सबसे अहम होता है। वे 2017 में वार्ड 226 से जीत चुकी है और इस बार उन्हें वार्ड 225 से मौका दिया गया है। कुल मिलाकर, बीजेपी की यह रणनीति साफ संकेत देती है कि पार्टी अब सिविक राजनीति में महिला नेतृत्व की केवल आरक्षण तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें बराबरी के साथ चुनावी मैदान में उतारकर एक मजबूत संदेश देना चाहती है।