स्व सहायता समूह की महिलाएं बना रही हैं प्राकृतिक गुलाल, इस बार होली होगी रंगीन और सुरक्षित

“प्राकृतिक गुलाल होली”


स्व सहायता समूह की महिलाएं बना रही हैं हर्बल गुलाल, इस बार होली होगी पूरी तरह प्राकृतिक

रायपुर:
होली के रंगों को इस बार और खास बनाने का प्रयास कर रही हैं गरियाबंद जिले की राखी महिला ग्राम संगठन की महिलाएं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत ये महिलाएं प्राकृतिक रंगों से गुलाल तैयार कर रही हैं, जिससे न केवल होली का त्योहार सुरक्षित बनेगा, बल्कि वे अपने परिवारों की आजीविका को भी मजबूत कर रही हैं।

प्राकृतिक रंगों से गुलाल की तैयारी

राखी महिला ग्राम संगठन की 10 सक्रिय महिलाएं पलाश से पीला, चुकंदर से लाल, पालक के पत्तों से हरा रंग निकालकर मक्के की सूखी डंठल से प्राप्त अरारोट पाउडर के साथ मिलाकर हर्बल गुलाल बना रही हैं। इस गुलाल में कोई भी हानिकारक रसायनिक तत्व नहीं है, जिससे यह न केवल त्वचा के लिए सुरक्षित है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।

महिलाएं बना रही हैं स्वावलंबन की मिसाल

ये महिलाएं न सिर्फ त्योहार को प्राकृतिक रूप से मनाने का एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर रही हैं, बल्कि वे आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक नई कहानी लिख रही हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाएं इस पहल के जरिए स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं, जो महिला सशक्तिकरण के लिए एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रहा है।

हर्बल गुलाल से मिलेगा अतिरिक्त आमदनी का स्रोत

बिहान समूह की महिलाओं ने पिछले वर्ष हर्बल गुलाल की बिक्री से लगभग 30,000 रुपये की आय की थी, जिसमें से शुद्ध मुनाफा 10,000 रुपये से अधिक था। इस साल, गुलाल की मांग को देखते हुए उन्होंने पहले से ही रंग बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। महिलाओं का कहना है कि इस प्रक्रिया में फूलों और पत्तियों का उपयोग किया जाता है, जिससे रंग त्वचा पर कोई हानि नहीं करता और यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है।

पारंपरिक और प्राकृतिक गुलाल के लाभ

  • गुलाबी रंग: चुकंदर और गुलाब की पंखुड़ियां
  • पीला रंग: हल्दी और गेंदे के फूल
  • हरा रंग: पालक और मेंहदी के पत्ते
  • नीला रंग: अपराजिता के फूल
  • लाल रंग: टेसू के फूल

इन प्राकृतिक सामग्रियों से बने गुलाल न केवल सेहत के लिए सुरक्षित हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी अच्छे हैं। इस तरह, महिलाएं न केवल एक सुरक्षित और पारंपरिक होली मनाने का प्रयास कर रही हैं, बल्कि यह कदम उन्हें स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ा रहा है।

कलेक्टर की सराहना

कलेक्टर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने इन महिलाओं के प्रयासों की सराहना की और उन्हें उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं अपने काम और सृजनात्मकता से समाज में एक नई पहचान बना रही हैं और स्वरोजगार सृजन के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन रही हैं।

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