योगी आदित्यनाथ शिक्षा
योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान: 2017 से पहले शिक्षा सरकार के एजेंडे में नहीं थी
वाराणसी में अपने काशी दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों को लेकर अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में शिक्षा सरकार के एजेंडे में नहीं थी और न ही गरीब और सामान्य बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी जाती थी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उस समय नकल की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया जाता था, जिससे शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य बिगड़ गया था।
‘स्कूल चलो अभियान’ का शुभारंभ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के कंपोजिट विद्यालय शिवपुर से ‘स्कूल चलो अभियान’ का विधिवत शुभारंभ किया। इस अभियान का पहला चरण 1 से 15 अप्रैल तक चलेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा सिर्फ प्रमाणपत्र या डिग्री प्राप्त करने का साधन नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के संस्कार, व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्र के भविष्य को गढ़ने का सबसे शक्तिशाली माध्यम है।
शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव
योगी आदित्यनाथ ने यह भी बताया कि उनके शासन में “ऑपरेशन काया कल्प” के तहत प्रदेश के 1 लाख 36 हजार से अधिक विद्यालयों को बुनियादी सुविधाओं से लैस किया गया है। इसके अलावा “ऑपरेशन निपुण” के माध्यम से बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि और उत्साह को बढ़ावा दिया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में ड्रॉपआउट दर 19 प्रतिशत से अधिक थी, जबकि अब यह घटकर लगभग 3 प्रतिशत हो गई है। इससे यह साफ़ होता है कि शिक्षा के क्षेत्र में सरकार द्वारा किए गए सुधारों का सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
बुनियादी सुविधाओं में सुधार
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पहले प्रदेश के स्कूलों में शौचालय, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभाव था, जिसे अब सरकार ने दूर किया है। इस बदलाव से बच्चों को बेहतर शिक्षा का माहौल प्राप्त हुआ है।
शैक्षिक नवाचार और उपलब्धियां
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान छात्रों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया और ‘शैक्षिक नवाचार एवं उपलब्धियां’ पुस्तिका का विमोचन किया। उन्होंने बच्चों को पाठ्य पुस्तकें और कॉपियां वितरित कीं और निपुण विद्यालयों तथा विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए।
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
इस कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग भी उपस्थित थे, जिनमें मंत्री राकेश सचान, संदीप सिंह, रवीन्द्र जायसवाल, अनिल राजभर, मेयर अशोक तिवारी और अन्य स्थानीय नेता शामिल थे।