बस्तर दशहरा इस बार हादसों के साये में: विजय रथ खींचने के दौरान भीषण दुर्घटना, एक ग्रामीण की मौत और कई घायल, व्यवस्था पर उठे सवाल

जगदलपुर: अपनी अनूठी और ऐतिहासिक परंपराओं के लिए दुनिया भर में मशहूर ‘बस्तर दशहरा’ इस बार आस्था के साथ-साथ गंभीर हादसों और सुरक्षा व्यवस्था में चूक को लेकर सुर्खियों में आ गया है। पर्व के दौरान हाल ही में ‘भीतर रैनी’ की रस्म से पहले आठ पहियों वाले विशालकाय विजय रथ को खींचने के वक्त एक दर्दनाक हादसा हो गया। रथ के पहिए की चपेट में आने से एक ग्रामीण की मौत हो गई, जबकि दूसरे का पैर कट गया। इस घटना के बाद से प्रशासन और आयोजन से जुड़े प्रबंधकों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

रथ की चपेट में आए ग्रामीण, एक की मौत

मिली जानकारी के अनुसार, परंपरा का निर्वहन करने के लिए बास्तानार के गुड़ियापारा से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे थे। विजय रथ को खींचने के दौरान अचानक संतुलन बिगड़ने से यह हादसा हुआ, जिसकी चपेट में आकर गुड़ियापारा निवासी खोपा कश्यप की दर्दनाक मौत हो गई, वहीं इसी गांव के रहने वाले सुखराम मंडावी का एक पैर कट गया। इस अप्रत्याशित हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कुछ समय के लिए रथ की गतिविधियां रोकनी पड़ीं। इसके अलावा, रथ को कुम्हड़ाकोट ले जाने के दौरान एक अन्य व्यक्ति का हाथ भी दबने की खबर है, हालांकि घायलों का इलाज जारी है।

इस बार लगातार सामने आ रहे हैं हादसे

बस्तर दशहरा के इतिहास में सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर इस साल जितने सवाल उठे हैं, उतने शायद पहले कभी नहीं देखे गए। इस बार दशहरा पर्व के दौरान हुए प्रमुख हादसे इस प्रकार हैं:

  • 16 अक्टूबर: फूल रथ परिक्रमा के दौरान बिजली के एक खंभे से जा टकराया, जिससे खंभा गिरने से करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए थे।
  • 18 अक्टूबर: फूल रथ एक अन्य निर्माणाधीन विजय रथ से टकरा गया, जिससे उसका अगला पहिया टूट गया। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी झड़प और विवाद भी हुआ था, जिसे बाद में जेसीबी और क्रेन की मदद से संभाला गया।
  • 21 अक्टूबर: फूल रथ की अंतिम परिक्रमा के वक्त भी पहिया टूटने के बावजूद रथ खींचने की जिद पर अड़े ग्रामीणों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी रही।
  • भीतर रैनी से पहले हादसा: अंततः विजय रथ पर मां दंतेश्वरी का छत्र विराजित होने से ठीक पहले हुए इस खौफनाक हादसे ने सब को झकझोर कर रख दिया।

जनप्रतिनिधियों और सुरक्षा पर उठ रहे सवाल

बस्तर दशहरा में हर साल हजारों की संख्या में ग्रामीण और सैलानी पूरी आस्था के साथ शामिल होते हैं। परंपरा के मुताबिक रथ खींचना बेहद पवित्र माना जाता है, लेकिन एक के बाद एक हो रही इन दुर्घटनाओं ने आयोजकों, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। जनता और विशेषज्ञों के बीच अब यह चर्चा आम हो गई है कि इतनी बड़ी और ऐतिहासिक भीड़ वाले आयोजनों में पुख्ता सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए जाते, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।

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