पखांजूर: समाज में अक्सर पुलिस की छवि सख्त और केवल कानून-व्यवस्था संभालने वाले महकमे के रूप में देखी जाती है। लेकिन छत्तीसगढ़ के पखांजूर में तैनात अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) राकेश कुर्रे ने अपनी संवेदनशीलता से यह साबित कर दिया है कि खाकी के भीतर एक संवेदनशील इंसान भी धड़कता है। उनकी एक मानवीय पहल ने तलाक की कगार पर पहुंच चुके एक बिखरते परिवार को टूटने से बचा लिया।

क्या था पूरा मामला?
मिली जानकारी के मुताबिक, पखांजूर क्षेत्र के एक दम्पति के बीच आपसी अनबन इस कदर बढ़ गई थी कि मामला तलाक तक पहुंच चुका था। पति-पत्नी के बीच की दूरियां इतनी गहरी हो चुकी थीं कि दोनों ने अलग होने का मन बना लिया था। इस विवाद के बीच सबसे बड़ा संकट उनके 3 साल के मासूम बच्चे के भविष्य पर मंडरा रहा था, जिसे लेकर समाज के प्रबुद्धजन भी चिंतित थे।
एएसपी राकेश कुर्रे की सूझबूझ लाई रंग
जब यह पारिवारिक विवाद एएसपी राकेश कुर्रे के संज्ञान में आया, तो उन्होंने इसे सिर्फ एक कानूनी मामला न मानकर मानवीय दृष्टिकोण से देखने का फैसला किया।
- काउंसलिंग और संवाद: एएसपी कुर्रे ने दोनों पक्षों को अपने दफ्तर में बुलाया और बेहद शांत माहौल में उनकी समस्याएं सुनीं।
- बच्चे के भविष्य पर फोकस: उन्होंने पति-पत्नी को समझाया कि उनके आपसी अहंकार या विवाद की सजा एक मासूम बच्चे को भुगतनी पड़ेगी।
- सकारात्मक परिणाम: पुलिस अधिकारी की समझाइश और सकारात्मक बातचीत का असर यह हुआ कि दोनों ने अपने गिले-शिकवे भुलाकर रिश्ते को एक और नया मौका देने का फैसला किया।
बंग समाज के प्रमुखों का मिला सहयोग
इस नेक काम में ‘बंग समाज’ के प्रतिष्ठित और प्रमुख लोगों ने भी अहम भूमिका निभाई। समाज के प्रबुद्धजनों ने दोनों पक्षों को समझाइश दी और भविष्य में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाते हुए परिवार को एकजुट रखने में पूरी मदद की।
समाज के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल
एएसपी राकेश कुर्रे की यह पहल यह साबित करती है कि पुलिस केवल अपराधियों पर कार्रवाई करने के लिए नहीं है, बल्कि समाज में बिगड़ते रिश्तों को जोड़ने और अमन-चैन कायम करने में भी अहम भूमिका निभा सकती है। उनकी इस दरियादिली की पूरे पखांजूर इलाके में सराहना हो रही है और यह घटना अन्य अधिकारियों व समाज के लिए एक बेहतरीन उदाहरण बन गई है।