Durg Cyber Fraud Action: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर ठगी और ऑनलाइन सट्टे के अवैध वित्तीय नेटवर्क पर पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। दुर्ग पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन फ्रॉड और सट्टे से जुड़े 3,162 म्यूल बैंक खातों (Mule Bank Accounts) की पहचान की है। इस गंभीर मामले में अब तक 257 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

ढाई करोड़ से अधिक की राशि फ्रीज
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, विभिन्न साइबर ठगी और ऑनलाइन सट्टे के मामलों से जुड़े कुल 2,75,50,091 रुपये (करीब 2.75 करोड़ रुपये) की डिस्प्यूट राशि को तुरंत प्रभाव से होल्ड (Freeze) कर दिया गया है। समय रहते की गई इस कार्रवाई से ठगी की रकम के आगे ट्रांसफर और निकासी पर रोक लग गई है।
इस तरह काम करता है म्यूल खातों का नेटवर्क
पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि साइबर अपराधी और सट्टा संचालक आम लोगों को कमीशन और आसान कमाई का लालच देकर उनके बैंक खाते हासिल करते हैं।
- इन खातों का इस्तेमाल अवैध रूप से ठगी और सट्टे की रकम जमा करने के लिए किया जाता है।
- इसके बाद डिजिटल माध्यमों और विभिन्न खातों के जरिए रकम को घुमाया जाता है।
- कुछ मामलों में लोग खुद पैसों के लालच में अपना खाता दूसरों को सौंप देते हैं, जबकि कुछ मामलों में संचालन अपराधी खुद करते हैं।
इस पूरी प्रक्रिया का खुलासा करने के लिए पुलिस लगातार बैंक रिकॉर्ड, KYC दस्तावेजों, UPI ट्रांजेक्शन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का गहराई से विश्लेषण कर रही है।

ताबड़तोड़ कार्रवाई और आंकड़ों पर एक नजर
- कुल पहचाने गए म्यूल खाते: 3,162
- FIR दर्ज और कार्रवाई: 63 मामलों में 1,668 खातों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई
- कुल गिरफ्तारियां: 257 आरोपी सलाखों के पीछे
- सत्यापन और लंबित मामले: 578 खातों का सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि 916 खातों पर तकनीकी विश्लेषण जारी है।
- जब्त सामान: छापेमारी और जांच के दौरान एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और केवाईसी दस्तावेज जैसे अहम डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
दुर्ग पुलिस की सख्त अपील
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों को आगाह करते हुए अपील की है कि कमीशन या आसान कमाई के लालच में कभी भी अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक या यूपीआई/ओटीपी (OTP) किसी अन्य व्यक्ति को न दें। यदि कोई व्यक्ति इस तरह का लालच या प्रस्ताव देता है, तो इसकी तुरंत सूचना राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930, साइबर पोर्टल या अपने नजदीकी पुलिस थाने को दें।