जेल से छूटने के बाद मनीष सिसोदिया ने बताई वजह

आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने जमानत पर जेल से बाहर आने के साथ ही केंद्र की भाजपा सरकार पर जुबानी हमले तेज कर दिए हैं। सिसोदिया ने शनिवार को पार्टी ऑफिस में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि अरविंद केजरीवाल ईमानदारी के प्रतीक हैं, उनके काम को बदनाम करने की साजिशें रची जा रही हैं। मुझे सात-आठ महीने में न्याय मिलने की उम्मीद थी, पर 17 महीने लग गए, लेकिन अंत में सत्य की जीत हुई।

सिसोदिया ने कहा कि जेल में रहने के दौरान मैंने 300 से अधिक किताबें पढ़ीं। गीता सबसे अधिक पढ़ी। उसको समझाने के लिए लिखी गई 10 किताबें और भी पढ़ीं। शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी 100 से अधिक किताब पढ़ीं। दुनियाभर के देशों में क्या हो रहा है उसको भी पढ़ा। अब ये समझा है कि 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाना है तो शिक्षा ही एकमात्र रास्ता है। उससे ही देश विकसित राष्ट्र बनेगा। अगर कोई बिना शिक्षा के विकसित राष्ट्र की बात करता है तो वो सिर्फ जुमलेबाजी है।

इसके अलावा मनीष सिसोदिया ने कहा कि, भारत छोड़ो आंदोलन के दिन 9 अगस्त को मुझे जमानत मिली, जब हमने इस बारे में गहनता से सोचा कि इसी दिन जमानत क्यों मिली तो हमें समझ आया कि अब हमें तानाशाही और भारत छोड़ो की आवाज उठानी पड़ेगी, उसके लिए लड़ना होगा। उन्होंने कहा कि मैं विपक्ष के लोगों से कहना चाहता हूं कि तानाशाही के खिलाफ हमें मिलकर लड़ना होगा। 

मैं इंडिया गठबंधन के साथियों और एनडीए में शामिल लोगों से भी कहना चाहता हूं कि हमें अपने लिए नहीं देश के लिए सबको एकजुट होकर लड़ना पड़ेगा। चुनाव भी लड़ना पड़ेगा। हमें मिलकर लड़ना होगा, तभी हम तानाशाही को हरा पाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के कथित शराब घोटाला मामले में 17 माह से जेल में बंद मनीष सिसोदिया को शुक्रवार को जमानत दे दी। गौरतलब है कि सिसोदिया को सीबीआई ने 26 फरवरी 2023 को गिरफ्तार किया था। करीब 17 महीने की कैद के बाद 52 वर्षीय मनीष सिसोदिया शुक्रवार शाम को तिहाड़ जेल से बाहर आए और पार्टी को कई झटकों के बीच एक नया बल दिया। 

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