झांसी मेडिकल कॉलेज में आग पर अखिलेश-मायावती ने सरकार को घेरा, CM योगी का 5-5 लाख मुआवजे का किया ऐलान

Jhansi Hospital Fire: यूपी के झांसी में मेडिकल कॉलेज के नवजात गहन देखभाल इकाई (एनआईसीयू) में लगी भीषण आग में 10 नवजात शिशुओं की मौत को लेकर सपा अध्‍यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। सपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अखिलेश यादव ने इसे चिकित्‍सकीय प्रबंध और प्रशासन की लापरवाही करार देते हुए कहा कि इस मामले में सच्‍ची जांच कर दोषियों को कडी सजा दी जानी चाहिए। उन्‍होंने घटना में मारे गए बच्‍चों के शोक संतप्‍त परिवारों को एक-एक करोड़ रुपए संवेदना राशि (मुआवजा) देने की भी मांग की। वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि ऐसी घातक लापरवाही के लिए दोषियों को सख्त कानूनी सजा जरूर मिलनी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि ऐसी घटनाओं की भरपाई असंभव है फिर भी सरकार पीड़ित परिवारों की हर प्रकार से मदद जरूर करे। इसके पहले सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने झांसी मेडिकल कॉलेज में आग लगने और नवजात बच्‍चों की मौत पर दु:ख जताते हुए मुख्यमंत्री राहत कोष से मारे गए बच्‍चों के माता-पिता को पांच-पांच लाख और घायलों के परिवारीजनों को 50-50 हजार रुपए की सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने भी झांसी की घटना पर शोक जताया है। उन्‍होंने कहा कि यह घटना दिल दहला देने वाली है। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, ‘राज्य सरकार की देखरेख में स्थानीय प्रशासन राहत पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।’

समाजवादी पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष और पूर्व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म ‘एक्‍स’ के जरिए झांसी मेडिकल कॉलेज की घटना के लिए जिम्‍मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्‍होंने लिखा- ‘झांसी मेडिकल कॉलेज में आग लगने से 10 बच्चों की मृत्यु एवं कई बच्चों के घायल होने का समाचार बेहद दुखद एवं चिंताजनक है। सबके प्रति संवेदनात्मक श्रद्धांजलि। आग का कारण ‘ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर’ में आग लगना बताया जा रहा है। ये सीधे-सीधे चिकत्सीय प्रबंधन व प्रशासन की लापरवाही का मामला है या फिर ख़राब क्वॉलिटी के आक्सीजन कॉन्संट्रेटर का। इस मामले में सभी ज़िम्मेदार लोगों पर दंडात्मक कार्रवाई हो। मुख्यमंत्री जी चुनावी प्रचार छोड़कर, ‘सब ठीक होने के झूठे दावे’ छोड़कर स्वास्थ्य और चिकित्सा की बदहाली पर ध्यान देना चाहिए। जिन्होंने अपने बच्चे गंवाएं हैं, वो परिवारवाले ही इसका दुख-दर्द समझ सकते हैं। ये सरकारी ही नहीं, नैतिक ज़िम्मेदारी भी है। आशा है चुनावी राजनीति करनेवाले पारिवारिक विपदा की इस घड़ी में इसकी सच्ची जाँच करवाएंगे और अपने तथाकथित स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्रालय में ऊपर-से-नीचे तक आमूलचूल परिवर्तन करेंगे। रही बात उप्र के ‘स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्री’ की तो उनसे कुछ नहीं कहना है क्योंकि उन्हीं के कारण आज उप्र में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा व्यवस्था की इतनी बदहाली हुई है। संकीर्ण-साम्प्रदायिक राजनीति की निम्न स्तरीय टिप्पणियाँ करने में उलझे मंत्री जी को तो शायद ये भी याद नहीं होगा कि वो ‘स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्री’ हैं। न तो उनके पास कोई शक्ति है न ही इच्छा शक्ति, बस उनके नाम की तख़्ती है। सबसे पहले उप्र भाजपा सरकार समस्त झुलसे बच्चों के लिए विश्वस्तरीय चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराए व जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है, उन समस्त शोक संतप्त परिवारों को 1-1 करोड़ संवेदना राशि दे। गोरखपुर न दोहराया जाए।’

बसपा सुप्रीमो मायावती ने झांसी मेडिकल कॉलेज की घटना पर दु:ख जताते हुए ‘एक्‍स’ पर लिखा- ‘यूपी, झाँसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज में आग लगने से 10 नवजात बच्चों की मौत की अति-दुखद घटना से कोहराम व आक्रोश स्वाभाविक। ऐसी घातक लापरवाही के लिए दोषियों को सख्त कानूनी सजा जरूरी। ऐसी घटनाओं की भरपाई असंभव फिर भी सरकार पीड़ित परिवारों की हर प्रकार से मदद जरूर करे।

आग की जांच का आदेश

सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने आग लगने के कारणों की जांच का आदेश दे दिया है। बताया जा रहा है कि बिजली की ओवरलोडिंग की वजह से शार्ट सर्किट हुआ और ये आग लग गई। घटना की त्रिस्‍तरीय जांच की जा रही है। फायर अफसर के मुताबिक बिजली की ओवर लोडिंग से आग लगने की सबसे ज्यादा संभावना मानी जा रही है। कुछ लोग वार्ड में सिलेंडर फटने की बात भी कह रहे हैं।

47 बच्‍चे भर्ती थे, 10 की हो गई मौत

वार्ड में 47 बच्चे ही थे, जिनमें से दस की मौत हो गई और 37 रेस्क्यू कर लिए गए। मेडिकल कॉलेज के इस हिस्से की बिजली काट दी गई थी। वार्ड में पूरी तरह धुआं भरा हुआ था जिससे दमकल कर्मियों को काम करने में दिक्‍कत आ रही थी।

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