पखांजूर/मटोली।
पखांजूर मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत मटोली के आश्रित ग्राम योगेंद्रनगर (P.V.30) में बच्चों की पढ़ाई और पोषण व्यवस्था दोनों ही भगवान भरोसे हैं। बीते पाँच वर्षों से यहां आंगनबाड़ी केंद्र की पढ़ाई पेड़ के नीचे हो रही है — न छत है, न भवन, और न ही बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाएं।
ग्रामीणों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने वर्षों से भवन की मांग की थी। अंततः 2023-24 में शासन द्वारा 8 लाख रुपए का भवन स्वीकृत हुआ। लेकिन जो भवन बच्चों की सुरक्षा और विकास के लिए बनना था, वह निर्माण से पहले ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया।
निर्माण इतना घटिया हुआ कि भवन की दीवारों में दरारें आ गईं, और यह अधूरा ढांचा अब बच्चों के लिए खतरे की घंटी बन गया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत और संबंधित विभाग के अधिकारियों ने इस निर्माण पर कोई निगरानी नहीं रखी। ठेकेदारी प्रथा के तहत किसी मनचाहे ठेकेदार को काम दे दिया गया, जिसने गुणवत्ताहीन सामग्री का इस्तेमाल कर सरकारी धन को डकार लिया।
भवन की दीवारों पर भले ही बड़े-बड़े अक्षरों में सरकारी योजनाओं के नाम और तारीखें लिख दी गई हैं, लेकिन हकीकत यह है कि बच्चों को आज भी तपती गर्मी और बारिश में पेड़ के नीचे बैठना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों ने इस मसले पर पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है।
नया भवन अधूरा, पुराना भवन जर्जर — ऐसे में बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ग्रामीणों ने अब एक बार फिर शासन से अपील की है कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा को ध्यान में रखते हुए इस मामले में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए और जल्द से जल्द एक मजबूत व पूर्ण भवन का निर्माण सुनिश्चित किया जाए।