डीएड अभ्यर्थी आंदोलन
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे डीएड अभ्यर्थियों का आंदोलन शुक्रवार को और उग्र हो गया। अपनी मांगों को लेकर अनशन कर रहे डीएड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों ने शुक्रवार सुबह नया रायपुर स्थित स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव के बंगले का घेराव किया। अभ्यर्थियों का कहना था कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
घेराव की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस बल पहुंचा। पुलिस और डीएड अभ्यर्थियों के बीच झूमा-झटकी की स्थिति बन गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाने की कोशिश की और कई अभ्यर्थियों को गाड़ियों में बैठाकर अलग-अलग स्थानों पर छोड़ दिया गया। इस दौरान महिला अभ्यर्थी भी आंदोलन में शामिल थीं, जिन्हें भी बलपूर्वक हटाया गया।
✊ क्यों भड़का डीएड अभ्यर्थियों का आंदोलन?
डीएड अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पूरी तरह योग्य हैं, फिर भी वर्षों से बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं। सहायक शिक्षक भर्ती 2023 में नियमों में बदलाव के कारण बड़ी संख्या में डीएड प्रशिक्षित अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए, जिससे उनमें भारी रोष है।
अभ्यर्थियों के मुताबिक, सरकार से कई दौर की बातचीत और ज्ञापन के बावजूद अब तक कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं आई है। इसी वजह से उन्होंने आंदोलन को तेज करने का फैसला लिया।
📌 डीएड अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें
- छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक भर्ती 2023 में डीएड अभ्यर्थियों को तत्काल नियुक्ति दी जाए
- भर्ती प्रक्रिया में किए गए नियमों के बदलाव की पुनः समीक्षा की जाए
- बीएड और डीएड के बीच योग्यता को लेकर स्पष्ट और स्थायी नीति बनाई जाए
- लंबे समय से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों से सरकार सीधे संवाद करे
- चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित किया जाए
🗣️ अभ्यर्थियों का क्या कहना है?
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण लिया है, लेकिन आज वही अभ्यर्थी सड़कों पर बैठने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि अगर सरकार ने जल्द कोई फैसला नहीं लिया तो आंदोलन को राज्यव्यापी और उग्र किया जाएगा।
👮 प्रशासन की स्थिति
फिलहाल प्रशासन की ओर से हालात पर नजर रखी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई है। वहीं, डीएड अभ्यर्थी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।