फीणी में गंदगी
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जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर से सामने आए एक वायरल वीडियो ने लोगों को हैरान और नाराज़ दोनों कर दिया है। इस वीडियो में एक मिठाई निर्माण यूनिट में फीणी बनाने के लिए आटे को नंगे पैर से गूंथते हुए देखा जा सकता है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग हरकत में आ गया है। जांच के बाद मौके पर मौजूद 110 किलो फीणी को नष्ट कर दिया गया।
यह मामला जोधपुर के जलोरी गेट क्षेत्र के पास स्थित सालासर बालाजी फेणी उद्योग से जुड़ा बताया जा रहा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि श्रमिक स्वच्छता के किसी भी मानक का पालन नहीं कर रहा, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा हो सकता है।
😡 क्यों मचा हड़कंप?
फीणी जोधपुर और आसपास के इलाकों में सर्दियों के मौसम में बेहद लोकप्रिय मिठाई मानी जाती है। इसे खासतौर पर दूध के साथ खाया जाता है और यह स्थानीय खानपान संस्कृति का अहम हिस्सा है। ऐसे में फीणी में गंदगी से जुड़ा यह वीडियो सामने आने के बाद लोगों में गहरी नाराज़गी और चिंता देखी जा रही है।
🏥 प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
वीडियो वायरल होते ही जोधपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) सुरेंद्र सिंह शेखावत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए खाद्य सुरक्षा टीम को तत्काल निरीक्षण के आदेश दिए।
खाद्य सुरक्षा टीम ने मौके पर पहुंचकर:
- यूनिट में मौजूद 110 किलो फीणी को नष्ट किया
- अन्य मिठाइयों के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे
- साफ-सफाई और फूड सेफ्टी मानकों की जांच शुरू की
सीएमएचओ ने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में मिठाइयां गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरतीं, तो संबंधित यूनिट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें लाइसेंस रद्द करना भी शामिल हो सकता है।
⚠️ सीएमएचओ की सख्त चेतावनी
सीएमएचओ सुरेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि—
- खाद्य पदार्थों की स्वच्छता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा
- मिठाई, कोल्ड ड्रिंक और अन्य खाद्य वस्तुओं का नियमित निरीक्षण किया जाना जरूरी है
- जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी
📱 सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा
इस वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं—
- एक यूजर ने लिखा: “मत कर भाई, आई लव फीणी”
- दूसरे ने कहा: “यह भरोसे के साथ धोखा है”
- कई लोगों ने संबंधित कंपनी का लाइसेंस रद्द करने की मांग की
लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं, बल्कि स्थानीय व्यवसायों की छवि भी खराब करती हैं।