‘क्या LG को लगता है कि दिल्ली वाले मूर्ख हैं, घास खाते हैं’; उपराज्यपाल पर भड़के सौरभ भारद्वाज ने कहा

दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने शुक्रवार को उपराज्यपाल वीके सक्सेना और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) पर राजधानी के रिज क्षेत्र में 1,600 से अधिक पेड़ों की कटाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट में झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि क्या ये संभव है कि रिज में जूनियर अधिकारी 1670 पेड़ कटवा दे। आगे उन्होंने पूछा कि क्या LG विनय सक्सेना को लगता है कि दिल्ली वाले मूर्ख हैं, घास खाते हैं?

आम आदमी पार्टी के नेता ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘जबकि दिल्ली में बच्चे और एनजीओ पेड़ लगा रहे हैं, केंद्र सरकार का डीडीए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना रिज क्षेत्र में 1,670 पेड़ों को काट रहा है। इसके अलावा, डीडीए और एलजी के वकील सुप्रीम कोर्ट में झूठ बोल रहे हैं।’

इस बारे में सौरभ ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘भाजपा और उसके LG का झूठ पकड़ा गया। फार्म हाऊस को बचाने के लिए काटे गए थे रिज के 1100 पेड़ और फिर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर झूठ बोला।’

उन्होंने बताया कि रिज में सड़क बनाने के लिए जो परमिशन मांगी गई थी उसमें मैप के जरिये जो एलाइनमेंट बताई गई थी, उससे उलट फार्म हाऊस बचाने के लिए असल में सड़क की एलाइनमेंट ही बदल दी गई। यानी जो बात हम कई महीनों से कह रहे थे वो बात अब साबित हो गई कि फार्म हाउस को बचाने के लिए ही जमीन पर सड़क की एलाइनमेंट ही बदल दी गई, यानि नक्शे के अनुसार फार्म हाउस हटाकर सड़क बनाई जानी थी लेकिन रिज के पेड़ काटकर सड़क बना दी गई।’

भारद्वाज ने कहा, ‘मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या ये संभव है कि जूनियर अधिकारी 1670 पेड़ कटवा दे, वो भी रिज में? और जब ये पेड़ कटवा रहे थे तो किसी फॉरेस्ट अफसर की हिम्मत नहीं हुई कि वो इन्हें रोक दे? कोई पुलिस अधिकारी वहां नहीं पहुंचा? क्या LG विनय सक्सेना को लगता है कि दिल्ली वाले मूर्ख हैं, घास खाते हैं?’

सौरभ ने बताया कि जब रिज में पेडों की कटाई का मामला सुप्रीम कोर्ट में आया तो DDA और केंद्र के वकीलों ने ऑन रिकॉर्ड कहा कि LG साहब पेड़ कटने वाली जगह पर नहीं गए। लेकिन बाद में जब कोर्ट ने एक-एक अफसर से हलफनामा मांगा तो एक अधिकारी ने बताया कि LG साहब 3 फरवरी को उस जगह गए थे जहां बाद में गैरकानूनी तरीके से पेड़ काटे गए थे और उस वक्त वहां सभी बड़े अधिकारी मौजूद थे जहां खड़े होकर पेड़ काटने की परमिशन दी गई।

मंत्री ने बताया, जब सुप्रीम कोर्ट ने LG साहब से पूछा कि आपको कब पता चला कि DDA ने गैरकानूनी तरीके से पेड़ काट दिये गए हैं? तो LG साहब ने हलफनामे में कहा कि 10 जून 2024 को पता चला लेकिन DDA के वाइस चेयरमैन ने एक खत LG साहब को लिखा था जिसमे LG साहब को लिखा गया था कि मैंने आपको ये बात 12 अप्रैल 2024 को भी बताई थी। यानि संवैधानिक पद पर बैठ कर LG साहब सुप्रीम कोर्ट के सामने शपथ लेकर झूठ बोल रहे हैं।

उन्होंने सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद एलजी की अध्यक्षता में डीडीए अपनी फाइलों की जांच से क्यों बच रहा है। भारद्वाज ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि क्या केंद्र एलजी को बचाने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर 1,670 पेड़ों की अवैध कटाई का आदेश दिया था।

भारद्वाज ने कहा कि इस समय पूरे उत्तर भारत में जिस तरह प्रदूषण फैला हुआ है उससे हमें समझ आता है कि पेड़ों की कितनी अहमियत है। और ऐसे में एक मामला आया कि दिल्ली के रिज क्षेत्र में 1100 पेड़ काट दिए गए। जब एक NGO ने इस मामले को उठाया तो मामला कोर्ट में पहुंचा और LG की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि 1100 पेड़ नहीं काटे गए।

इससे पहले, शीर्ष अदालत ने एलजी और डीडीए उपाध्यक्ष द्वारा रिज क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के बारे में उन्हें कब पता चला, इस बारे में दिए गए बयानों और समयसीमा में विसंगतियों को नोट किया।

बता दें कि दक्षिणी दिल्ली के सतबारी रिज क्षेत्र में 1,100 से अधिक पेड़ों की अवैध कटाई के लिए डीडीए उपाध्यक्ष के खिलाफ दायर अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई चल रही है। (एजेंसी इनपुट के साथ)

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