छत्तीसगढ़ में तेज गर्मी में जनगणना ड्यूटी का विरोध, शिक्षकों ने उठाई ये मांगें: 43 डिग्री तापमान में डोर-टू-डोर सर्वे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक

जनगणना ड्यूटी विरोध


छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी में जनगणना ड्यूटी पर शिक्षकों का विरोध, स्वास्थ्य को लेकर उठाई गंभीर मांगें

छत्तीसगढ़ में इन दिनों 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुके तापमान और हीटवेव के बीच जनगणना ड्यूटी को लेकर शिक्षकों में नाराजगी का माहौल बढ़ता जा रहा है। विशेष रूप से शिक्षकों का कहना है कि इस गर्मी में घर-घर जाकर सर्वे करना न केवल शारीरिक रूप से कठिन है, बल्कि यह उनकी सेहत के लिए भी खतरनाक हो सकता है।

मई के बजाय जून से जनगणना ड्यूटी शुरू करने की मांग

शिक्षक संघों ने इस मामले में अपनी नाराजगी जताते हुए सरकार से यह मांग की है कि जनगणना कार्य को मई के बजाय जून से शुरू किया जाए। उनका कहना है कि मई और जून छत्तीसगढ़ में सबसे गर्म महीने होते हैं, और इस दौरान शिक्षकों को ग्रीष्मकालीन अवकाश पर भेजा जाता है। ऐसे में जब छुट्टियां चल रही होती हैं, तो उन्हें जबरन काम पर भेजना उचित नहीं है।

1 मई से शुरू होगा जनगणना का पहला चरण

छत्तीसगढ़ में जनगणना का पहला चरण 1 मई से 30 मई तक निर्धारित किया गया है। इस चरण में ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस’ के तहत प्रत्येक घर, परिवार और उपलब्ध सुविधाओं का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसमें कर्मचारियों को घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करनी होगी, जो इस समय की अत्यधिक गर्मी में बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

जनगणना के दौरान ली जाने वाली जानकारी

जनगणना के दौरान कुल 33 बिंदुओं पर जानकारी एकत्र की जाएगी। इनमें निम्नलिखित जानकारी शामिल होगी:

  • मकान की स्थिति (कच्चा या पक्का)
  • परिवारों की संख्या
  • बुनियादी सुविधाएं जैसे पेयजल, शौचालय, बिजली कनेक्शन
  • कुकिंग फ्यूल
  • इंटरनेट सुविधा
  • टीवी और रेडियो की उपलब्धता

शिक्षकों ने कहा कि इन सभी बिंदुओं पर जानकारी एकत्र करना सरल नहीं होगा, विशेषकर जब मौसम अत्यधिक गर्म हो और कई क्षेत्रों में वेंटिलेशन की समस्या हो।

स्मार्टफोन की अनिवार्यता पर आपत्ति

शिक्षक नेताओं ने जनगणना कार्य में स्मार्टफोन की अनिवार्यता पर भी आपत्ति जताई है। जनगणना के लिए कम से कम 12.0 वर्जन वाले स्मार्टफोन का इस्तेमाल करना अनिवार्य किया गया है। इस शर्त के कारण, जिन शिक्षकों के पास पुराने स्मार्टफोन हैं, उन्हें मजबूरी में नए स्मार्टफोन खरीदने होंगे, जिससे उनका आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।

स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चिंता

शिक्षकों का कहना है कि इस गर्मी में उन्हें खुले में, तेज धूप के बीच काम करना पड़ रहा है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। उनका कहना है कि स्कूलों में छुट्टियां हैं, तो उन्हें ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान ड्यूटी पर भेजने का यह निर्णय ठीक नहीं है। शिक्षकों ने सरकार से यह अपील की है कि इस काम को करने के लिए कोई और उपयुक्त समय निर्धारित किया जाए।

स्थानीय विरोध और सरकार से सुधार की मांग

शिक्षकों का कहना है कि यदि सरकार ने इस विषय पर तुरंत कार्रवाई नहीं की तो वे जनगणना ड्यूटी का बहिष्कार भी कर सकते हैं। शिक्षकों के अनुसार, यह न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण है, बल्कि इससे जनगणना के कार्य में भी कमी हो सकती है।

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