कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए रेप-मर्डर केस के मुख्य आरोपी संजय रॉय को सोमवार को सियालदह कोर्ट में पेश किया गया. भारी सुरक्षा के बीच उसे पुलिस वैन से कोर्ट ले जाया गया, जहां उसकी आवाज को दबाने के लिए वैन का हॉर्न बजाया गया. इसके साथ ही वैन पर हाथ भी मारे गए, ताकि उसकी आवाज मीडियाकर्मियों तक न पहुंच पाए.
मुख्य आरोपी संजय रॉय ने पिछली सुनवाई के दौरान वैन से ही मीडिया से बात करते हुए कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त विनीत गोयल पर सनसनीखेज आरोप लगाए थे. उसने कहा था कि वो पूरी तरह से निर्दोष है. उसे इस केस में फंसाया गया है. उसने कोई वारदात नहीं की है. पूर्व पुलिस आयुक्त और स्पेशल डिप्टी कमिश्नर (डिटेक्टिव डिपार्टमेंट) ने उसे फंसाने की साजिश रची है.
सोमवार को पांचवें दिन संजय रॉय को इस मुकदमे के हिस्से के रूप में अदालत के समक्ष पेश किया गया, जिसकी सुनवाई दिन-प्रतिदिन हो रही है. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पेशी के दौरान संजय को बोलने से रोकने के लिए पुलिस ने लगातार वाहन का हॉर्न बजाया. कोर्ट बिल्डिंग में ले जाते समय वाहन पर थप्पड़ भी मारे. उसको ले जाने के लिए छोटी वैन का इस्तेमाल किया गया.
पिछली सुनवाई में भी संजय रॉय ने कोर्ट में कहा था, “मैंने बलात्कार और हत्या नहीं की है. मैं निर्दोष हूं. मुझे फंसाया गया है. सरकार ने मुझे फंसाया है. उन्होंने मुझे चुप रहने की धमकी दी है. मेरे विभाग ने मुझे धमकाया है.” पूर्व पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल पर इस सनसनीखेज आरोप के बाद वेस्ट बंगाल के राज्यपाल ने राज्य सरकार से मामले की जांच के लिए कहा था.
हालांकि, सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में संजय रॉय को ही असली अपराधी बताया है. इसके साथ ही इस केस को गैंगरेप की बजाए रेप ही बताया गया है. चार्जशीट के अनुसार सिविक संजय रॉय ने ही वारदात को अंजाम दिया है. पीड़िता से लिए गया सीमन का सैंपल उससे मैच हो चुका है. सीबीआई का दावा है कि सीएफएसएल रिपोर्ट से पुष्टि हो गई है कि सीमन संजय रॉय का है.
कई भौतिक साक्ष्य, परिस्थितिजन्य साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर साबित होता है कि इस वारदात को संजय रॉय ने अकेले ही अंजाम दिया है. 9 अगस्त को क्राइम सीन से मिले छोटे बाल को जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया था. रिपोर्ट में ये बाल संजय रॉय के बताए गए हैं. इस जघन्य वारदात के 24 घंटे के भीतर ही कोलकाता पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था.
100 गवाहों, 12 पॉलीग्राफ टेस्ट, सीसीटीवी कैमरों, फॉरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल की कॉल डिटेल और लोकेशन, ईयरफोन और आरोपी के बयान के बाद सीबीआई ने चार्जशीट फाइल की है. इसमें सीबीआई ने भी ये साफ कर दिया है कि ट्रेनी जूनियर डॉक्टर के साथ रेप हुआ था, ना कि गैंगरेप. सीबीआई की इस चार्जशीट के मुताबिक, इस केस को सुलझाने में तीन चीजें सबसे अहम साबित हुई हैं.
इनमें पहली, सेमिनार रूम के बाहर सीसीटीवी कैमरे से मिली तस्वीरें हैं. इन तस्वीरों में 9 अगस्त की सुबह 4 बजे संजय रॉय सेमिनार हॉल के अंदर जाता दिखाई देता है. आधे घंटे बाद वो बाहर निकल जाता है. इस दौरान सेमिनार हॉल में संजय के अलावा ना और कोई दूसरा गया, न बाहर आया. दूसरी, सेमिनार हॉल से मिला संजय रॉय का मोबाइल का ईयरफोन. जो उसके ब्लूटूथ से कनेक्ट हुआ था.
तीसरी, सबसे अहम चीज फॉरेंसिक रिपोर्ट थी. ट्रेनी जूनियर डॉक्टर के नाखुन में मिले खून से संजय का डीएनए मैच कर गया. इसके अलावा सीमन का डीएनए भी संजय से मैच कर गया था. प्राइवेट पार्ट से भी संजय का ही डीएनए सैंपल मिला था. चार्जशीट के मुताबिक, वारदात वाली रात संजय ने काफी शराब पी रखी थी. नशे में वो तड़के चार बजे अस्पताल के तीसरी मंजिल पर पहुंचा था.