मानहानि के एक केस में आरोपी ‘आप’ नेता और दिल्ली की सीएम आतिशी ने सोमवार को दिल्ली की अदालत से कहा कि राजनीतिक मानहानि के मामलों का दायरा बहुत व्यापक है क्योंकि राजनीतिक दल सार्वजनिक चर्चा का विषय हैं। मुख्यमंत्री आतिशी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील रमेश गुप्ता ने स्पेशल जज विशाल गोगने के समक्ष यह दलील दी। वकील गुप्ता, भाजपा के एक नेता की शिकायत पर एक मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा आतिशी को जारी समन के खिलाफ दलील पेश कर रहे थे।
रमेश गुप्ता ने दलील दी कि शिकायतकर्ता प्रवीण शंकर कपूर की आतिशी द्वारा मानहानि नहीं हुई है क्योंकि उन्होंने कथित मानहानिकारक बयान भाजपा के खिलाफ दिया था। उन्होंने दलील दी, ‘‘वह (कपूर) मानहानि के पीड़ित नहीं हैं। अपीलकर्ता ने भाजपा के खिलाफ बयान दिया था। यदि इसे (मानहानि को) सही माना जाए तो यहां भाजपा पीड़ित पक्ष है, जो शिकायत दायर कर सकती है…किसी राजनीतिक दल के लाखों सदस्य हो सकते हैं, लेकिन सभी मानहानि की शिकायत नहीं दायर कर सकते, दायरा बहुत व्यापक है।’’
16 दिसंबर को शिकायतकर्ता की दलीलें सुनेगी अदालत
अदालत इस मामले में शिकायतकर्ता की दलीलें 16 दिसंबर को सुनेगी। स्पेशल जज ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में मामले की कार्यवाही पर 22 नवंबर को रोक लगा दी थी।
भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने आतिशी और आम आदमी पार्टी (आप) राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर उनकी मानहानि करने का आरोप लगाया था।
‘आप’ नेताओं ने कथित तौर पर दावा किया था कि भाजपा ने दिल्ली सरकार को गिराने के लिए उसके कई विधायकों से संपर्क किया।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 28 मई को आतिशी को समन जारी किया था, हालांकि उसने मामले में केजरीवाल को तलब नहीं किया था। कोर्ट ने 23 जुलाई को आतिशी को जमानत दे दी थी, जब वह समन के बाद अदालत में पेश हुई थीं।
आतिशी ने कथित तौर पर दावा किया था कि भाजपा ने ‘आप’ के 21 विधायकों से संपर्क किया और उनमें से प्रत्येक को पाला बदलने के लिए 25 लाख रुपये की पेशकश की।
आतिशी पर झूठे दावे करने का आरोप लगाते हुए, प्रवीण शंकर कपूर ने आपराधिक मानहानि की शिकायत के साथ अदालत का रुख किया था। उन्होंने दलील दी कि आतिशी अपने दावे के समर्थन में सबूत पेश करने में विफल रहीं।