PM मत्स्य संपदा योजना
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के छोटे से गांव केकराखोली से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि सही प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर गांव का युवा भी बड़ी सफलता हासिल कर सकता है। ग्राम केकराखोली निवासी पुरुषोत्तम राम मरकाम ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की मदद से अपनी जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। आज उनका आधुनिक Aqua Hub पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
पारंपरिक खेती छोड़ अपनाया आधुनिक मछली पालन
पहले पुरुषोत्तम पारंपरिक तरीके से मछली पालन करते थे, लेकिन इससे उन्हें ज्यादा फायदा नहीं मिल रहा था। लगातार मेहनत के बावजूद आमदनी सीमित थी। इसके बाद उन्होंने नई तकनीकों को सीखने का फैसला किया और बड़ौदा आरसेटी से वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने सीखा:
- बायोफ्लॉक तकनीक
- जल प्रबंधन
- उन्नत मछली पालन
- कम लागत में अधिक उत्पादन
- आधुनिक फिश टैंक प्रबंधन
यही प्रशिक्षण उनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी साबित हुआ।
17 लाख की सरकारी मदद ने बदल दी जिंदगी
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत पुरुषोत्तम को करीब 17 लाख रुपये की सहायता मिली। इसके बाद उन्होंने अपनी 80 डिसमिल निजी जमीन पर आधुनिक फिश टैंक तैयार किए।
उन्होंने लगभग 8 लाख रुपये का निवेश कर अत्याधुनिक Aqua Hub तैयार किया, जहां अब बड़े पैमाने पर पंगेसियस और रूपचंदा जैसी मछलियों का उत्पादन किया जा रहा है।
आज उनके टैंकों में लगभग:
- 10 टन मछली तैयार है
- 2 क्विंटल मछली बेचकर 40 हजार रुपये की कमाई हो चुकी है
- गांव के 8 से 10 लोगों को रोजगार मिल रहा है
यह मॉडल अब आसपास के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है।
गांव में रोजगार का नया केंद्र बना Aqua Hub
पुरुषोत्तम का यह प्रयास सिर्फ व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है। उनका Aqua Hub अब ग्रामीण रोजगार का बड़ा केंद्र बन गया है। गांव के कई युवा यहां काम करके नियमित आय प्राप्त कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में इसी तरह आधुनिक मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाए, तो हजारों युवाओं को गांव में ही रोजगार मिल सकता है।
कलेक्टर ने की सराहना
हाल ही में धमतरी कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने पुरुषोत्तम के Aqua Hub का दौरा किया। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों में इस तरह का नवाचार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रहा है।
प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि ऐसे युवाओं को आगे भी तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ दिया जाएगा।
अब खुद की फीड यूनिट लगाने की तैयारी
पुरुषोत्तम अब अपने बिजनेस को और बड़ा बनाना चाहते हैं। उनका अगला लक्ष्य मछली दाना यानी फीड निर्माण यूनिट शुरू करना है।
उनका मानना है कि:
- स्थानीय स्तर पर फीड उपलब्ध होगी
- मछली पालन की लागत घटेगी
- ज्यादा युवाओं को रोजगार मिलेगा
- गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी सफलता की कहानी
पुरुषोत्तम राम मरकाम की कहानी यह साबित करती है कि अगर युवा नई तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करें, तो गांव में रहकर भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि उनकी सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग, मेहनत और सरकार की जनहितैषी योजनाओं को जाता है। सही दिशा और प्रशिक्षण मिलने पर गांव की मिट्टी से भी सोना उगाया जा सकता है।