अर्जुन कपूर कोर्ट आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने अर्जुन कपूर को दी राहत, डीपफेक और आपत्तिजनक कंटेंट पर सख्त निर्देश
नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन कपूर को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने अभिनेता के व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) को अंतरिम संरक्षण प्रदान करते हुए स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति या संस्था अर्जुन कपूर के नाम, छवि, आवाज या पहचान का व्यावसायिक उपयोग उनके अनुमति के बिना नहीं कर सकती।
यह आदेश उस याचिका पर दिया गया था, जिसे अर्जुन कपूर ने गूगल और मेटा (फेसबुक) जैसी टेक कंपनियों के खिलाफ दायर किया था। अदालत ने इन कंपनियों को निर्देशित किया कि वे अर्जुन कपूर से जुड़े आपत्तिजनक या अनधिकृत कंटेंट को हटाने और उसके प्रसार को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाएं।
क्या था अर्जुन कपूर का आरोप?
अर्जुन कपूर ने आरोप लगाया था कि कई सोशल मीडिया अकाउंट्स और वेबसाइट्स उनकी अनुमति के बिना उनका नाम और छवि व्यावसायिक उपयोग के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। इस तरह के अनधिकृत उपयोग में उनके नाम पर सामान बेचना, प्रचार के लिए उनकी तस्वीरों का उपयोग करना, और उनके नाम का इस्तेमाल कर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन शामिल था। अर्जुन कपूर के वकील ने अदालत को बताया कि कई जगह उनके नाम पर फर्जी बुकिंग भी की जा रही है और उनका फोटो उपयोग करके लोग सामान बेचने जैसी गतिविधियों में संलिप्त हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश
न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने अपने आदेश में कहा कि कोई भी सामग्री जो मानहानिकारक या अवैध रूप से व्यावसायिक हो, उस पर कार्रवाई की जा सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कंटेंट आपत्तिजनक है और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहा है, तो उसे तुरंत हटाया जाए। इसके साथ ही अदालत ने गूगल और मेटा को आदेश दिया कि वे उन सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी भी उपलब्ध कराएं, जिनके माध्यम से यह कंटेंट फैलाया जा रहा है।
डीपफेक वीडियो और अश्लील सामग्री पर चिंता
अदालत ने डीपफेक वीडियो और अश्लील सामग्री के प्रसार पर भी गंभीर चिंता जताई। डीपफेक वीडियो, जो कि AI द्वारा बनाए जाते हैं, में अभिनेता की छवि का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता है। अदालत ने कहा कि इस तरह का दुरुपयोग न केवल व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि यह अपूरणीय क्षति भी पहुंचा सकता है।
अर्जुन कपूर के वकील का बयान
अर्जुन कपूर के वकील प्रवीण आनंद ने अदालत को बताया कि इंटरनेट पर अभिनेता से जुड़ा आपत्तिजनक कंटेंट मौजूद है, जिसमें अश्लील सामग्री और फेक न्यूज शामिल हैं। इनमें कई इमेज AI से बनाई गई या मॉर्फ्ड (बदली हुई) हैं। उदाहरण के तौर पर, कुछ तस्वीरों में उन्हें जानवरों के साथ जोड़ा गया है, जबकि कुछ में उन्हें गोलगप्पे बेचते हुए दिखाया गया है। वकील ने यह भी कहा कि यह सामग्री न तो मजाक के दायरे में आती है और न ही व्यंग्य मानी जा सकती है।
कोर्ट का रुख
दिल्ली हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक हस्तियों को अपनी छवि और प्रतिष्ठा को बचाने का अधिकार है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को अधिक जांच-परख और आलोचना का सामना करना पड़ता है। इसलिए, हर मामले में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
अर्जुन कपूर का राहत भरा कदम
यह आदेश अर्जुन कपूर के लिए एक महत्वपूर्ण जीत मानी जा रही है, जो लंबे समय से अपने व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे थे। अब, अभिनेता के नाम और छवि का व्यावसायिक उपयोग बिना उनकी अनुमति के नहीं किया जा सकेगा। इसके साथ ही, इस फैसले से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आपत्तिजनक सामग्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।