रूस की प्रमुख रक्षा कंपनियों की आय में पिछले साल 40 प्रतिशत की भारी बढ़त हुई है। इसके विपरीत, अमेरिकी और यूरोपीय रक्षा कंपनियों की आय में क्रमशः केवल 2.5 प्रतिशत और 0.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है। इस खुलासे से पता चलता है कि यूक्रेन युद्ध के बीच रूस किस कदर अपनी ताकत का इजाफा कर रहा है जबकि पश्चिमी देशों की चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में वैश्विक रक्षा उद्योग की औसत आय वृद्धि 4.2 प्रतिशत रही, जबकि रूस ने अपने रक्षा उत्पादन को युद्धकालीन स्थिति में अधिक प्रभावी ढंग से बढ़ावा दिया। यूक्रेन में अपने युद्ध को सपोर्ट करने के लिए रूस बहुत तेजी से हथियार बनाने में जुटा है, जबकि पश्चिमी देशों का नाटो संगठन इसमें पिछड़ रहा है।
रूस की आय में तेजी, पश्चिमी देशों के लिए चिंताजनक
अल-जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की शीर्ष रक्षा कंपनियों की कुल आय 25.5 बिलियन डॉलर रही, जो अमेरिका ($317 बिलियन) और यूरोप ($133 बिलियन) के मुकाबले काफी कम है। बावजूद इसके, रूस ने अपने आर्थिक और औद्योगिक संसाधनों को युद्ध के लिए प्रभावी रूप से तैयार किया है। SIPRI की रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस की दो प्रमुख कंपनियां, रोस्टेक और यूनाइटेड शिपबिल्डिंग कॉरपोरेशन, शीर्ष 100 रक्षा कंपनियों में शामिल हैं। 2014 में क्रीमिया पर कब्जे के बाद से ही रूस ने अपने रक्षा उत्पादन को छिपाकर रखा और दुनिया को इसकी ज्यादा खबर तक नहीं लगने दी।
रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था का प्रभाव
रूस ने अपनी सैन्य खर्च को पिछले साल 24 प्रतिशत बढ़ाकर $109 बिलियन कर दिया, जो उसके सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 5.9 प्रतिशत है। इसके मुकाबले नाटो देशों का औसत रक्षा खर्च 1.9 प्रतिशत है। रिपोर्ट में बताया गया है कि रूस की आर्थिक वृद्धि का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा रक्षा उद्योग से आया है। 2024 में रूस का रक्षा और सुरक्षा बजट 70 प्रतिशत बढ़कर 157 बिलियन डॉलर हो गया, और यह वृद्धि 2027 तक जारी रहने की संभावना है।
पश्चिमी देशों की चुनौतियां
अमेरिकी रक्षा कंपनियों को सप्लाई चैन की समस्याओं का सामना करना पड़ा। उदाहरण के लिए, लॉकहीड मार्टिन, जो दुनिया की सबसे बड़ी रक्षा उपकरण निर्माता है, उसकी आय में लगातार तीसरे साल गिरावट आई। RTX (पहले रेथियॉन) जैसी कंपनियां भी इन्हीं समस्याओं से जूझ रही हैं।
यूरोप की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। फ्रांस की दासौल्ट एविएशन ने अपने राफेल विमान के ऑर्डर में 60 प्रतिशत की गिरावट देखी। यूरोपीय संघ ने अपने रक्षा उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं, जैसे कि “एक्ट इन सपोर्ट ऑफ एम्यूनिशन प्रोडक्शन (ASAP)” के तहत 500 मिलियन यूरो ($526 मिलियन) का निवेश।
यूक्रेन की तैयारियां
यूक्रेन ने अपने रक्षा उद्योग में 7 बिलियन यूरो ($7.36 बिलियन) का निवेश किया है और 2025 तक इसे तीन गुना करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही, यूरोपीय संघ ने 2024 की दूसरी छमाही तक हर साल दो मिलियन गोले बनाने की क्षमता हासिल करने का दावा किया है।
हालांकि इस रिपोर्ट इस बात पर भी जोर देती है कि रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ नहीं है। आर्थिक प्रतिबंधों और उच्च ब्याज दरों के कारण कई रूसी रक्षा कंपनियां घाटे में चल रही हैं और उनके दिवालिया होने की संभावना है। पश्चिमी देशों और नाटो के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वे अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करें, ताकि न केवल यूक्रेन को आवश्यक समर्थन मिल सके, बल्कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना भी किया जा सके।