“20 साल से बसे, फिर भी बेघर होने का डर: वार्ड 33 में पट्टे की मांग पर भड़के लोग, प्रशासन की दोहरी नीति सवालों में”

पट्टा विवाद वार्ड 33


पट्टा विवाद वार्ड 33: विकास हुआ, अधिकार नहीं मिले

मध्यप्रदेश के बालाघाट नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 33 में रहने वाले सैकड़ों लोगों की जिंदगी आज असमंजस और डर के बीच फंसी हुई है। हैरानी की बात यह है कि जहां एक ओर प्रशासन और नगर पालिका ने यहां सड़क, नाली और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा दी हैं, वहीं दूसरी ओर अब यही प्रशासन यह कह रहा है कि जिस जमीन पर लोग वर्षों से घर बनाकर रह रहे हैं, वह आवासीय पट्टे के योग्य नहीं है।

यही विरोधाभास आज पट्टा विवाद वार्ड 33 को एक बड़ा जनसमस्या बना रहा है।


20 साल से रह रहे लोग, फिर भी अनिश्चित भविष्य

स्थानीय निवासियों का कहना है कि:

  • वे पिछले 20 वर्षों से इसी स्थान पर रह रहे हैं
  • कई परिवारों को पहले ही आवासीय पट्टे मिल चुके हैं
  • लेकिन आज भी अनेक परिवार पट्टे से वंचित हैं
  • हर दिन उन्हें अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का डर सताता है

यह डर केवल घर छिनने का नहीं, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य के असुरक्षित होने का है।


पीएम आवास योजना से भी वंचित

पट्टे के अभाव में वार्ड 33 के कई परिवार:

  • प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं ले पा रहे
  • पक्का मकान बनने की उम्मीद टूट रही है
  • सरकारी योजनाओं से बाहर हो रहे हैं

लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन पट्टा दे दे, तो वे सम्मान के साथ एक सुरक्षित जीवन जी सकते हैं।


कलेक्टर कार्यालय तक पहुंची आवाज

अपनी मांग को लेकर वार्ड के लोग मंगलवार, 13 जनवरी को:

  • अपना रोज़गार छोड़कर
  • सामूहिक रूप से
  • कलेक्टर कार्यालय पहुंचे

यह कोई पहली बार नहीं था। इससे पहले भी कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन समाधान आज तक नहीं निकला।


प्रशासन का तर्क और बड़ा सवाल

प्रशासन का कहना है कि:

  • यह भूमि छोटे पेड़-पौधों और घासबीड़ की श्रेणी में आती है
  • इसलिए इसे आवासीय भूमि में बदला नहीं जा सकता

लेकिन इससे कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं:

  • यदि भूमि आवास योग्य नहीं थी, तो
    • नगर पालिका ने सड़क और नाली क्यों बनाई?
    • बिजली विभाग ने कनेक्शन किस आधार पर दिए?
  • क्या निर्माण से पहले भूमि की वैधानिक जांच नहीं हुई?

जब सरकारी विभागों ने मिलकर इस क्षेत्र को पूरी तरह मानव निवास योग्य बना दिया, तो अब सिर्फ कागजों के आधार पर लोगों को पट्टे से वंचित रखना कितना न्यायसंगत है?


यह सिर्फ जमीन का नहीं, जीवन का सवाल

यह मामला केवल एक भू-खंड का नहीं है, बल्कि:

  • गरीब और मेहनतकश परिवारों की सुरक्षा का
  • उनके बच्चों के भविष्य का
  • और सम्मान के साथ जीने के अधिकार का है

लोग प्रशासन से कोई विशेष सुविधा नहीं मांग रहे, बल्कि सिर्फ वह अधिकार चाहते हैं, जो उन्हें वर्षों से मिल जाना चाहिए था।

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