कुपोषण सुधार
गंभीर कुपोषण से सामान्य श्रेणी में पहुंची शान्वी: समय पर पहचान और पोषण का परिणाम
रायपुर, 20 मई 2026 – बीजापुर जिले के विकासखंड भोपालपटनम के ग्राम पीलूर की एक वर्षीय बालिका शान्वी मड़े का स्वास्थ्य अब सामान्य श्रेणी में पहुंच गया है। यह उपलब्धि महिला एवं बाल विकास विभाग की नियमित निगरानी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रयास और परिवार के सहयोग का परिणाम है।
शान्वी की स्थिति और उपचार
शान्वी के स्वास्थ्य की शुरुआत में गंभीर कुपोषण की श्रेणी में थी। उसकी माता, श्रीमती सरिता मड़े के अनुसार, बच्ची का वजन उम्र के हिसाब से कम था और स्वास्थ्य कमजोर दिख रहा था। उस समय शान्वी का वजन केवल 7.900 किलोग्राम था।
स्थिति को देखते हुए:
- आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने परिवार से लगातार संपर्क बनाए रखा।
- संतुलित आहार, स्तनपान, पूरक पोषण और नियमित स्वास्थ्य जांच के संबंध में जानकारी दी।
- शुरू में परिवार पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) ले जाने के लिए तैयार नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे समझाइश के बाद सहमति दी।
विभागीय निगरानी और मार्गदर्शन
- परियोजना अधिकारी श्रीमती कल्पना रथ और सेक्टर सुपरवाइजर कु. उजाला बंजारे ने परिवार से मुलाकात कर आवश्यक परामर्श प्रदान किया।
- 2 अप्रैल 2026 को शान्वी को एनआरसी में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकीय देखरेख में उसका उपचार और पोषण प्रबंधन किया गया।
परिणाम और सुधार
एनआरसी में उपचार और घर लौटने के बाद नियमित देखभाल के कारण:
- शान्वी का वजन बढ़कर 9.200 किलोग्राम हो गया।
- ऊंचाई 70.2 सेंटीमीटर दर्ज की गई।
- अब शान्वी सामान्य श्रेणी में है।
सीख और महत्व
शान्वी की कहानी यह दिखाती है कि:
- समय पर पहचान और नियमित निगरानी बच्चों के स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- पोषण संबंधी जानकारी और परिवार का सहयोग उपचार प्रक्रिया को प्रभावी बनाता है।
- विभागीय सक्रियता और स्थानीय कार्यकर्ताओं की मेहनत से कुपोषण जैसी गंभीर समस्या पर काबू पाया जा सकता है।