विश्व मधुमेह दिवस 13 नवंबर को है। मौजूदा वक्त में जीवनशैली में तेजी से बदलाव, अनियमित खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण बीते कुछ सालों में युवाओं से लेकर बुजुर्ग तक बड़ी संख्या में लोग मधुमेह की चपेट में आ रहे हैं।
इससे लोगों की जीवनचर्या काफी प्रभावित हो रही है। खास बात यह है कि देश-दुनिया में जिस तेजी से डायबिटीज के मरीज बढ़ रहे हैं, बाजार में शुगर फ्री खाद्य और पेय पदार्थों का दबदबा भी उसी रफ्तार से बढ़ रहा है।
आज बाजार में शुगर फ्री जूस, मिठाई, जैम, आइसक्रीम, बिस्किट की भरमार है। जगदंबा नगर में डिपार्टमेंटल स्टोर चलाने वाले मनीष जोशी के मुताबिक, बीते दो सालों से कई कंपनियां शुगर फ्री उत्पाद बना रही हैं।
इसमें जूस, बिस्किट, आइसक्रीम, जैम की डिमांड बड़े पैमाने पर ग्राहक करते हैं। डायटीशियन, योग और जिम की शरण डायबिटीज से पीड़ित लोग डायटीशियन से सलाह ले रहे हैं। योगाभ्यास कर रहे हैं और नियमित जिम में भी खूब पसीना बहा रहे हैं।
पीलीकोठी ने निवासी नीरज ने बताया कि वह बीते पांच साल से मधुमेह से पीड़ित हैं। वह डायटीशियन की सलाह के अनुसार ही भोजन करते हैं। योग करते हैं और नियमित जिम भी जाते हैं। उनके साथी भी यही रूटीन अपनाते हैं।
गिलोय और खास जूस का कारोबार भी बढ़ा डायबिटीज के रोगियों की संख्या बढ़ने के साथ ही गिलोय और खास किस्म के जूस का कारोबार भी बढ़ गया है। शहर में आईटीआई के पास, पनचक्की चौराहा, गौलापार पुल, ब्लॉक दफ्तर के पास आयुर्वेदिक जूस स्टॉल भी रोज सुबह के वक्त लगते हैं। इसमें गिलोय, नीम के पत्ते सहित अन्य जड़ी-बूटियां मिलाकर खास किस्म का जूस तैयार किया जाता है। कई कंपनियां भी मार्केट में शुगर फ्री जूस बेच रही हैं।
100 में 12 लोग मधुमेह की चपेट में
वरिष्ठ फिजिशियन एवं मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलांबर भट्ट ने बताते हैं कि उत्तराखंड में 100 वयस्कों में औसतन 12 लोग मधुमेह से पीड़ित हैं। डॉ. भट्ट ने आईसीएमआर की रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह बात बताई। उन्होंने कहा कि डायबिटीज की दिक्कत को जीवनशैली में बदलाव कर नियंत्रित किया जा सकता है।
बच्चों में भी मधुमेह की शिकायत
एसटीएच में बाल रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. ऋतु रखोलिया ने बताया कि आज के वक्त में हर माह चार से पांच बच्चों में भी मधुमेह के लक्षण पाए जा रहे हैं। पहले यह संख्या एक साल में होती थी।14 से 16 साल के किशोर भी मधुमेह की चपेट में आ रहे हैं।
एसटीएच में 50 फीसदी मधुमेह रोगी
एसटीएच में मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुभाष जोशी ने बताया कि रोजाना औसतन 300 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इसमें 50 फीसदी मरीज डायबिटीज से पीड़ित आते हैं। डॉ. जोशी ने बताया कि अनियमित दिनचर्या में सुधार कर मधुमेह रोग से काफी हद तक राहत मिल सकती है। आजकल मधुमेह की कई दवाएं बीते सालों की अपेक्षा सरकारी अस्पतालों में 60 से कम दाम पर मिल रही हैं।
जीवनचर्या बदली तो मिली राहत
मार्निंग वॉकर वेलफेयर क्लब के अध्यक्ष हरीश चन्द्र पांडे ने बताया कि उन्होंने एक ग्रुप बनाया है। इसमें भी कई लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। लेकिन उसमें अधिकांश ने अपनी जीवन शैली में बदलाव कर शुगर लेवल काफी हद तक कम किया है।