जल मित्र योजना
छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत बनाने और युवाओं को रोजगार देने के लिए ‘जल मित्र’ योजना शुरू की है। इस योजना के तहत हर गांव में एक प्रशिक्षित जल मित्र नियुक्त किया जाएगा, जो नलों, पाइपलाइन और जल टंकियों की देखभाल करेगा।
योजना का उद्देश्य
- ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत लगाए गए नलों और पाइपलाइन की लंबी अवधि तक रखरखाव सुनिश्चित करना।
- गांव स्तर पर तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान देना।
- युवाओं को स्थानीय रोजगार के अवसर प्रदान करना।
कितने जल मित्र होंगे और प्रशिक्षण
- प्रदेश में 20 हजार जल मित्र तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
- इनमें से दो हजार युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
- पंचायत विभाग के अधीन कार्य करेंगे और उनका मानदेय स्थानीय सरपंच के माध्यम से भुगतान किया जाएगा।
वर्तमान स्थिति
- छत्तीसगढ़ में 49.95 लाख ग्रामीण परिवारों में से 83.30 प्रतिशत घरों को नल कनेक्शन से जोड़ा जा चुका है।
- 5,000 से अधिक गांवों में शत-प्रतिशत पेयजल आपूर्ति शुरू हो गई है।
- राज्य सरकार का लक्ष्य है कि 20 हजार गांवों में प्रत्येक गांव में एक जल मित्र नियुक्त हो।
विशेष योजना: माओवादी प्रभावित क्षेत्र
- बस्तर और अन्य माओवादी प्रभावित क्षेत्रों के लिए केंद्र सरकार से 1,300 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता मांगी गई है।
- इस राशि से 70 बड़ी समूह जल प्रदाय योजनाएं शुरू की जाएंगी।
- तीन हजार से अधिक सुदूर और संवेदनशील गांवों तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाया जाएगा।
गांवों में दिख रहे बदलाव
- घीकुड़िया (राजनांदगांव): सोलर आधारित जल आपूर्ति के कारण ग्रामीणों को नियमित पेयजल मिलने लगा है।
- धनौली (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर): पहले महिलाओं और बच्चों को कुओं और हैंडपंप से पानी लाना पड़ता था, अब घरों तक नल से पानी पहुँचता है।
योजना के फायदे
- ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की नियमित उपलब्धता।
- युवाओं को स्थानीय रोजगार के अवसर।
- पंचायत स्तर पर जल आपूर्ति और पाइपलाइन का सतत रखरखाव।
- माओवादी प्रभावित और दूरदराज के गांवों में भी सुरक्षित और स्वच्छ पानी।