क्या बढ़ेंगे LPG, पेट्रोल और डीजल के दाम? अमेरिका की स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नाकेबंदी से भारत पर पड़ सकता है गंभीर असर”

“LPG पेट्रोल डीजल दाम बढ़ेंगे”


आर्टिकल:

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी के आदेश के बाद, भारत में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिका के इस फैसले के बाद, सवाल उठ रहा है कि क्या भारत में इन प्रमुख ऊर्जा उत्पादों की कीमतें फिर से बढ़ेंगी?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी: भारत पर होगा असर?

ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में हुई वार्ता बेनतीजा रही, जिसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी का आदेश दे दिया है। इस इलाके से दुनिया के प्रमुख तेल और गैस आपूर्ति मार्ग गुजरते हैं। अगर यह स्थिति और बिगड़ती है, तो इसका असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।

भारत को कच्चा तेल और गैस की बड़ी मात्रा खाड़ी के देशों से आयात होती है, और इनमें से अधिकांश की आपूर्ति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होती है। अगर अमेरिका की नाकेबंदी जारी रहती है और स्थिति और तनावपूर्ण होती है, तो भारत के लिए तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे कच्चे तेल के दाम में और वृद्धि हो सकती है। ऐसे में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है।

एलपीजी सिलेंडर के दाम में बढ़ोतरी

हाल ही में, कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में बड़ी वृद्धि देखी गई थी। 1 अप्रैल 2026 को, कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के रेट में ₹195 से ₹218 तक का इजाफा किया गया था। दिल्ली में अब एक एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹2078.50 तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा, छोटे 5 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर के दाम में भी ₹51 की बढ़ोतरी हुई थी।

घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें मार्च में बढ़ी थीं, और उसके बाद किसी भी और वृद्धि को स्थगित कर दिया गया था। लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में वृद्धि होती है, तो यह सिलेंडर की कीमतों पर भी दबाव डाल सकती है, जिससे उपभोक्ताओं को और ज्यादा महंगे सिलेंडर खरीदने पड़ सकते हैं।

पेट्रोल और डीजल की कीमतें: क्या बढ़ेंगी?

जहां तक पेट्रोल और डीजल की बात है, युद्ध के शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत $70 प्रति बैरल के आसपास थी। लेकिन अब, यह $100 प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी है। कच्चे तेल की कीमतों में इस तरह की वृद्धि, तेल विपणन कंपनियों पर दबाव डाल रही है।

हालांकि, हाल ही में सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर ₹10 प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी, जिससे थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन अब, जब तेल की कीमतों में और इजाफा होगा, तो सरकार के लिए यह राहत को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

नायरा और शेल इंडिया जैसी तेल कंपनियों ने पहले ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा कर दिया है। अब यह देखना है कि सरकार और तेल कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत को कब तक झेल पाती हैं, और क्या आने वाले दिनों में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल के दाम फिर से बढ़ेंगे।

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की उम्मीदें

अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की वार्ता बेनतीजा रही थी, लेकिन अब 16 अप्रैल 2026 को दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस बैठक को लेकर कोई स्पष्टता नहीं आई है कि क्या इससे स्थिति में कोई सुधार होगा या नहीं।

अगर बातचीत सफल होती है, तो इससे तनाव में कमी आ सकती है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फिर से तेल की आपूर्ति सामान्य हो सकती है। लेकिन अगर तनाव बढ़ता है, तो इसके प्रभाव से भारत जैसे देशों को भी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

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