पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में की थी बेंगलुरु की स्ट्रीट वेंडर टीएस निंगम्मा के काम की तारीफ, अब बेरोजगार होने की आई नौबत

बेंगलुरु। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में जिन महिला स्ट्रीट वेंडर टीएस निंगम्मा (TS Ningamma) की सफलता की कहानी देश के सामने रखी थी, अब उनकी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। एक तरफ जहां पीएम मोदी ने महिला सशक्तिकरण के उदाहरण के तौर पर उनका जिक्र किया था, तो वही अब उन पर बेरोजगारी का संकट मंडराने लगा है। ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के अधिकारियों द्वारा उनका ठेला हटाने की चेतावनी दी गई है, जिसके बाद से परिवार चिंता में आ गया है।

मूल रूप से हसन जिले की रहने वाली टीएस निंगम्मा बेंगलुरु में मगदी रोड पर होसाहल्ली मेट्रो स्टेशन के पास पिछले कुछ समय से छोटा सा ठेला लगाती हैं। निंगम्मा और उनके पति ने मिलकर इडली, डोसा और सांभर बेचने का एक छोटा व्यवसाय शुरू किया था। अपने इस काम को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना (PM Swanidhi Yojana) के तहत सरकारी सहायता और लोन मिला था। इस लोन की मदद से उन्होंने थोक में सामग्री खरीदी और अपने मेनू में कुछ नए व्यंजन भी जोड़े जिससे ग्राहकों की संख्या और आय दोनों में बढ़ोतरी हुई थी।

मन की बात में पीएम मोदी ने की थी सराहना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात के 137वें एपिसोड के दौरान बेंगलुरु की इस महिला वेंडर की कहानी का विशेष रूप से उल्लेख किया था। पीएम ने बताया था कि कैसे सरकारी योजनाओं के जरिए महिलाओं की आजीविका मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा था कि निंगम्मा अपने व्यवसाय से होने वाली कमाई के सहारे अपने तीनों बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी जानकारी दी थी कि देश भर में स्वनिधि योजना के लाभार्थियों में करीब 46 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं और लगभग 35 लाख महिलाएं इस योजना का लाभ उठा रही हैं।

अब आ गया है नया संकट

सरकारी मदद से कारोबार पटरी पर आने के बाद अब अचानक स्थिति बदल गई है। हाल ही में जीबीए (Greater Bengaluru Authority) के अधिकारियों ने मेट्रो स्टेशन के पास फुटपाथ पर दुकान लगाने को लेकर निंगम्मा को ठेला हटाने की चेतावनी दे डाली है। अधिकारियों के इस सख्त रुख के बाद स्ट्रीट वेंडर निंगम्मा और उनके परिवार के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि यदि ठेला हटा दिया जाता है, तो परिवार का गुजर-बसर कैसे होगा, इसको लेकर चिंता सताने लगी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है।

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