रायपुर: कहते हैं कि सही समय पर लिया गया एक सही फैसला किसी की भी पूरी जिंदगी बदल सकता है। कुछ ऐसा ही चमत्कार छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में देखने को मिला है, जहां राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत चलने वाली ‘चिरायु योजना’ ने एक मासूम बच्चे के जीवन को नई रोशनी दी है। जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे छोटे से भाव्यांश साहू को इस योजना के जरिए नया जीवन मिल गया है।
आंगनबाड़ी की रूटीन जांच से खुला उम्मीद का रास्ता
इस प्रेरक कहानी की शुरुआत इसी साल फरवरी 2026 में हुई। धमतरी की शहरी चिरायु योजना की मेडिकल टीम जालमपुर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-01 में बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित जांच (Routine Checkup) कर रही थी।
इसी दौरान डॉक्टरों की टीम ने अपनी सतर्कता दिखाते हुए मासूम भाव्यांश के स्वास्थ्य में कुछ असामान्य लक्षण भांप लिए। बिना किसी देरी के मामले की गंभीरता को समझा गया और बच्चे को तुरंत आगे के उच्च स्तरीय इलाज के लिए श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल, नया रायपुर रेफर कर दिया गया। इस दौरान चिरायु टीम ने न सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की, बल्कि शोकाकुल और चिंतित परिवार को मानसिक रूप से भी पूरा संबल दिया।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में हुई सफल सर्जरी
अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने भाव्यांश की गहन जांच की और स्थिति को देखते हुए तुरंत सर्जरी का निर्णय लिया। योजना के दिशा-निर्देशों के तहत बच्चे को 31 अगस्त 2026 को अस्पताल में भर्ती किया गया।
इसके बाद 2 सितंबर को अस्पताल के अनुभवी कार्डियक सर्जनों की टीम ने एक जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। डॉक्टरों की कड़ी निगरानी, नर्सों की सेवा और सही देखरेख का नतीजा यह रहा कि मासूम के स्वास्थ्य में बहुत तेजी से सुधार देखा गया। आखिरकार, सर्जरी के कुछ ही दिनों बाद 9 सितंबर को भाव्यांश को पूरी तरह स्वस्थ घोषित कर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
जरूरतमंद परिवारों के लिए वरदान बन रही है ‘चिरायु योजना’
छत्तीसगढ़ शासन की यह महत्वकांक्षी योजना आज समाज के अंतिम छोर पर खड़े परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात बीमारियों, गंभीर कमियों और विकास से जुड़ी बाधाओं को समय रहते पहचानना और उनका निःशुल्क व उच्च स्तर का इलाज करवाना है।
चिरायु टीम की तत्परता और श्री सत्य साईं अस्पताल के बेहतरीन चिकित्सकीय सहयोग ने आज एक बार फिर साबित कर दिया है कि सही तालमेल से बड़े-बड़े संकटों को टाला जा सकता है। आज भाव्यांश पूरी तरह स्वस्थ है और अपने घर में सामान्य बच्चों की तरह खिलखिला रहा है। उसकी यह मुस्कान प्रदेश सरकार की इस संवेदनशील योजना की सबसे बड़ी सफलता है।