महानदी का सीना चीर रहे रेत माफिया: कुरुद खदान में दिनदहाड़े धड़ल्ले से चल रहा अवैध उत्खनन, प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ के आरंग क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली महानदी की कुरुद खदान इन दिनों अवैध रेत उत्खनन का बड़ा अड्डा बन चुकी है। खनिज विभाग की खानापूर्ति वाली कार्रवाई के बाद माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब रात के साथ-साथ दिन के उजाले में भी बेखौफ होकर रेत की अवैध निकासी की जा रही है।

छिपकर नहीं, अब दिनदहाड़े हो रही लूट

कुछ दिन पहले जब मीडिया में यह मामला गरमाया, तो खनिज विभाग की टीम ने कुरुद खदान पर छापामार कार्रवाई की औपचारिकता पूरी की। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अधिकारियों के पहुँचने से पहले ही ‘लीकेज’ के चलते खनन करने वाले वाहन मौके से फरार हो गए। जैसे ही विभाग की गाड़ियाँ वापस लौटीं, माफिया ने अगले ही दिन से फिर से अपनी गतिविधियां तेज कर दीं। अब स्थिति यह है कि सोमवार सुबह से ही दर्जनों ट्रैक्टर और भारी गाड़ियां कतारों में खड़ी होकर दिनदहाड़े नदी से रेत का अवैध उठाव कर रही हैं।

क्यों मची है रेत लूटने की इतनी होड़?

स्थानीय जानकारों के मुताबिक, कुरुद खदान पर माफिया की गिद्ध नजरें गड़ने के पीछे दो मुख्य वजहें हैं:

  1. प्राकृतिक भंडार: हाल ही में बारिश के दौरान बैराजों के गेट खुलने और हरदीडीह एनीकट टूटने के कारण कुरुद क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली रेत का विशाल भंडार जमा हो गया है।
  2. प्रस्तावित बैराज परियोजना: महानदी पर आरंग क्षेत्र के मोहमेला और सिरपुर के बीच लगभग ₹689.76 करोड़ की लागत से ‘मोहमेला-सिरपुर बैराज और पुल निर्माण’ प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद कुरुद, हरदीडीह और आसपास की खदानें हमेशा के लिए बंद हो जाएंगी। यही वजह है कि खदानों पर ताला लगने से पहले माफिया इस बेशकीमती रेत को हर हाल में लूट लेना चाहता है।

जनविरोध और NGT के नियमों की धज्जियाँ

कुरूद रेत खदान की लीज और संचालन को लेकर हुई जनसुनवाई में स्थानीय ग्रामीणों ने पर्यावरण को होने वाले नुकसान का हवाला देते हुए कड़ा विरोध जताया था। इसके अलावा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के स्पष्ट प्रतिबंधों को भी पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।

ग्रामीणों का आरोप: कुंभकर्णी नींद में प्रशासन

कुरूद ग्राम पंचायत के उप सरपंच निमेश साहू ने प्रशासन पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा है कि हरदीडीह और कुरुद के बॉर्डर से रात के वक्त तीन दर्जन से अधिक ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनों से अवैध खनन किया जा रहा है। जबकि आधिकारिक रूप से अभी कोई भी खदान चालू नहीं हुई है। स्थानीय लोगों के समर्थन और शासन-प्रशासन की सुस्ती के चलते माफिया के हौसले सातवें आसमान पर हैं।

क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी?

इस पूरे मामले पर सहायक खनिज अधिकारी उमेश भार्गव का कहना है कि अवैध उत्खनन की सूचना मिलने पर विभाग लगातार कार्रवाई करता है। कुरुद में दोबारा अवैध उत्खनन की जानकारी मिलते ही खनिज विभाग की टीम को एक बार फिर मौके के लिए रवाना कर दिया गया है।

अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन इस खुली लूट पर कोई स्थायी और कड़ी कार्रवाई करता है, या महानदी का यह सीना इसी तरह चीरता रहेगा।

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