महाराष्ट्र की कंपनी दे रही रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाएं, फिर पखांजूर में ही क्यों हो रहा विरोध?

चीफ एडिटर: रिकेश सरकार

पखांजूर। उत्तर बस्तर कांकेर जिले के परलकोट क्षेत्र में विकास, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र से जुड़ी लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड (Lloyds Metals and Energy Limited) छत्तीसगढ़ में औद्योगिक गतिविधियों के जरिए स्थानीय लोगों को रोजगार और बुनियादी सुविधाएं दे रही है। कंपनी का कारोबार और माइंस गतिविधियां महाराष्ट्र से छत्तीसगढ़ तक फैली हैं। यहां से खनिज सामग्री के परिवहन से स्थानीय चालकों, मजदूरों और अन्य लोगों को रोजगार मिल रहा है।

सड़कों और बुनियादी ढांचे में सुधार

कंपनी ने क्षेत्र की सड़कों के निर्माण और मरम्मत में भी अहम योगदान दिया है। मरोड़ा से भानुप्रतापपुर मार्ग, पखांजूर, मरोड़ा, कापसी और बड़ेगांव की सड़कों पर मरम्मत का काम कराया गया है। मरोड़ा से महाराष्ट्र जाने वाले मुख्य मार्ग पर नई सड़क भी बनाई गई है। इन सुविधाओं का लाभ माइंस से जुड़े लोगों के अलावा आम ग्रामीणों, किसानों और व्यापारियों को भी मिल रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं से मिल रही राहत

सूरजगढ़ स्थित लॉयड्स काली अम्माल अस्पताल क्षेत्र के मरीजों के लिए बड़ी राहत बना हुआ है। पखांजूर, बांदे और छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों से मरीज यहां इलाज के लिए आ रहे हैं। मरीजों को निःशुल्क इलाज, भोजन और रहने की सुविधा मिल रही है। कमजोर परिवारों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है, जिन्हें अब इलाज के लिए बड़े शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।

विरोध क्यों और कहाँ है पेंच?

दूसरी तरफ, स्टेट हाईवे क्रमांक-25 पर माइंस वाहनों की आवाजाही को लेकर पखांजूर में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहा है। सवाल यह है कि जब कंपनी से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है, मुफ्त इलाज मिल रहा है और सड़कें बन रही हैं, तो कुछ लोगों को इस व्यवस्था से परेशानी क्यों है?

यदि प्रदूषण, सड़क सुरक्षा या यातायात को लेकर कोई समस्या है, तो शिकायत करना हर नागरिक का हक है। लेकिन क्या इसका समाधान वाहनों को रोककर और आम लोगों की रोजी-रोटी छिनकर किया जाना चाहिए? क्या इस विरोध का खामियाजा उन गरीब परिवारों को नहीं भुगतना पड़ेगा, जिनके घर का चूल्हा इसी रोजगार से जलता है?

समाधान की है जरूरत

स्टेट हाईवे किसी की निजी संपत्ति नहीं है। इसका संचालन प्रशासनिक नियमों के तहत होता है। किसी भी विवाद का हल बातचीत से होना चाहिए, न कि टकराव से।

आज जरूरत है कि विरोध करने वाले लोग, कंपनी प्रबंधन, जनप्रतिनिधि और प्रशासन एक मंच पर आएं और व्यावहारिक चर्चा करें। परलकोट क्षेत्र को टकराव नहीं, विकास और बेहतर तालमेल की जरूरत है, ताकि इसका फायदा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सके।

सबसे बड़ा सवाल: आखिर नुकसान किसका हो रहा है—कंपनी का, कुछ लोगों का या उन हजारों आम नागरिकों का, जिन्हें रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं?

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