रायगढ़ (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहाँ आधी रात को एक तेज रफ्तार निजी एम्बुलेंस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने एक मेडिकल स्टोर से जा भिड़ी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दुकान का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि दुर्घटना के बाद चालक पूरी तरह नशे में धुत पाया गया, जिसे देखकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया।

क्या है पूरी घटना?
यह सनसनीखेज हादसा मेडिकल कॉलेज रोड स्थित पेट्रोल पंप के पास देर रात को हुआ।
- बेकाबू रफ्तार का कहर: प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एम्बुलेंस बहुत ज्यादा गति में आ रही थी और चालक उस पर से अपना नियंत्रण पूरी तरह खो बैठा था।
- खंभे और दुकान से टक्कर: अनियंत्रित होने के बाद एम्बुलेंस सीधे सड़क किनारे स्थित ‘तनुजा मेडिकल स्टोर’ के बाहर जा घुसी और दुकान के खंभे से टकरा गई। टक्कर के बाद मौके पर मलबा बिखर गया।
- एयरबैग ने बचाई जान: हादसे के दौरान एम्बुलेंस का एयरबैग तुरंत खुल गया, जिससे नशे में धुत चालक की जान बाल-बाल बच गई।
गनीमत रही कि टल गया बड़ा जनहानि हादसा
हादसे का सबसे राहत भरा पहलू यह रहा कि यह घटना देर रात के वक्त हुई, जिसके कारण सड़क और आसपास के इलाके में आवाजाही न के बराबर थी। यदि यह हादसा दिन के समय या शाम की व्यस्तता में होता, तो वहाँ मौजूद राहगीर और ग्राहक इसकी चपेट में आ सकते थे, जिससे एक बड़ा खून-खराबा या जनहानि हो सकती थी।
चालक के नशे में होने का आरोप और पुलिस कार्रवाई
हादसे की आवाज सुनकर आसपास के लोग और दुकान संचालक तुरंत मौके पर जमा हो गए। लोगों का आरोप है कि एम्बुलेंस का चालक शराब के नशे में इस कदर धुत था कि वह ठीक से खड़ा तक नहीं हो पा रहा था।
- मेडिकल स्टोर संचालक ने इस पूरी घटना की आधिकारिक शिकायत चक्रधर नगर थाने में दर्ज करा दी है।
- पुलिस अब चालक के मेडिकल परीक्षण और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर नशे की पुष्टि करने में जुटी है, ताकि नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।
निजी एम्बुलेंस संचालन पर उठे बड़े सवाल
इस दुर्घटना ने प्रशासन और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
- क्या आपातकालीन सेवा देने वाले निजी एम्बुलेंस चालकों की नियमित स्वास्थ्य और नशामुक्ति जाँच होती है?
- क्या बिना फिटनेस और अयोग्य चालकों के भरोसे मरीजों की जिंदगी दांव पर लगाई जा रही है?
रायगढ़ की इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि यदि एम्बुलेंस चालक ही सड़क पर इस तरह बेकाबू होकर चलेंगे, तो आम नागरिकों की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा।