रायपुर में विवाद: शहीद वीर नारायण सिंह के स्मारक को फ्लेक्स से ढका, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने दर्ज कराई कड़ी आपत्ति

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन (17 सितंबर) के अवसर पर किए गए राजनीतिक प्रचार-प्रसार ने एक बड़ा तूल पकड़ लिया है। शहर के ऐतिहासिक जयस्तंभ चौक पर लगाए गए बैनर-पोस्टर और फ्लेक्स के बीच छत्तीसगढ़ के महान स्वतंत्रता सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह के स्मारक को ही पूरी तरह से ढंक दिए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद से स्थानीय लोगों और राजनीतिक दलों में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है।

जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने की सख्त कार्रवाई की मांग

शहीद के स्मारक को प्रचार सामग्री से ढके जाने को छत्तीसगढ़िया समाज की भावनाओं और महापुरुष के सम्मान के खिलाफ बताते हुए ‘जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी’ ने इसके खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी के जिला पदाधिकारियों ने इस मामले में गोलबाजार थाने में लिखित आवेदन देकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की है। इसके साथ ही, नगर निगम आयुक्त को भी ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की गुहार लगाई गई है।

किन धाराओं के तहत की गई है कार्रवाई की मांग?

जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी द्वारा पुलिस और प्रशासन को दिए गए आवेदन में कई गंभीर धाराओं का हवाला दिया गया है, जो निम्नलिखित हैं:

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS): धारा 285, 270 और 352
  • छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956: धारा 322 और 335

पार्टी का कहना है कि ये धाराएं सार्वजनिक मार्गों पर अवरोध उत्पन्न करने और बिना अनुमति के विज्ञापन या पोस्टर लगाने के मामलों में लागू होती हैं।

पुलिस प्रशासन का आश्वासन

मामले की गंभीरता को देखते हुए जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने उच्च पुलिस अधिकारियों से भी मुलाकात की। पार्टी के अनुसार, पुलिस प्रशासन ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए संबंधित व्यक्तियों की पहचान करने और नियमानुसार उचित कानूनी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

महापुरुषों के सम्मान की रक्षा सर्वोपरि

जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि शहीद वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और प्रदेश के गौरवशाली ‘पुरखा’ हैं। उनके ऐतिहासिक स्मारकों को इस तरह से निजी या राजनीतिक प्रचार का माध्यम बनाना बेहद निंदनीय है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में ऐतिहासिक धरोहरों और स्मारकों की गरिमा के साथ इस प्रकार का खिलवाड़ किया गया, तो वे और भी उग्र आंदोलन करेंगे।

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