नक्सलियों की साजिश
घटना का विवरण:
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में शनिवार को नक्सलियों द्वारा लगाए गए एक तात्कालिक विस्फोटक उपकरण (आईईडी) के विस्फोट में तीन जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) जवान घायल हो गए। यह विस्फोट बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने के अभियान के दौरान हुआ। पुलिस की एक टीम नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए अभियान चला रही थी, जब विस्फोट हुआ।
- घायल जवान:
तीन जवान विस्फोटक उपकरण के संपर्क में आ गए और घायल हो गए। फिलहाल, उन्हें उचित चिकित्सा उपचार दिया जा रहा है। - स्थान:
विस्फोट नारायणपुर जिले से सटे एक वन क्षेत्र में हुआ, जो नक्सलियों की सक्रियता वाले इलाकों में से एक है।
31 मार्च के बाद पहली बड़ी घटना:
- 31 मार्च को राज्य को नक्सली हिंसा से मुक्त घोषित किया गया था, और उसके बाद से यह पहली बार है जब नक्सली गतिविधि से जुड़ी कोई विस्फोटक घटना घटी है। हालांकि, इस घटना ने यह साबित कर दिया कि नक्सलियों की मौजूदगी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई है, और उनकी गतिविधियों का खतरा अभी भी बना हुआ है।
नक्सली हिंसा से मुक्त राज्य का ऐतिहासिक निर्णय:
- नक्सलवाद से मुक्त राज्य:
भारत को वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) से मुक्त घोषित किए जाने के बाद, केंद्र सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों को नई निगरानी श्रेणियों में पुनर्गठित किया है। यह घोषणा 31 मार्च को हुई थी, जिसमें देश के किसी भी जिले को नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया। - विरासत और महत्वपूर्ण जिले:
37 जिलों को “विरासत और महत्वपूर्ण जिले” के रूप में वर्गीकृत किया गया है, यानी ये इलाके अब सक्रिय नक्सली हिंसा से मुक्त हैं, लेकिन सुरक्षा और विकास पर निरंतर ध्यान देना आवश्यक है। इस नए वर्गीकरण के तहत इन जिलों में नक्सली गतिविधियों की संभावना खत्म नहीं हुई है, और अधिकारियों को सतर्क रहकर इन क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास कार्यों पर ध्यान देना होगा।
चिंताजनक जिला:
- पश्चिम सिंहभूम जिला:
झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले को “चिंताजनक जिला” के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसका मतलब यह है कि भले ही उग्रवादी नेटवर्क कमजोर हो गए हों, फिर भी इस जिले में सतर्कता और निगरानी की आवश्यकता बनी हुई है।
केंद्र और राज्य सरकार की रणनीति:
- निरंतर निगरानी और विकास:
छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में उग्रवाद विरोधी अभियानों के परिणामस्वरूप, अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को सक्रिय संघर्ष क्षेत्रों से बदलकर ऐसे क्षेत्रों में परिवर्तित किया गया है जिन्हें निरंतर निगरानी और विकास सहायता की आवश्यकता है।