बाबा साहेब के विचार
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रायपुर, छत्तीसगढ़: पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय और डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय में आज संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 135वीं जयंती हर्षोल्लास और गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने चिकित्सालय परिसर में स्थित बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनके महान विचारों और योगदान को याद किया।
🌟 बाबा साहेब के विचारों का महत्व
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “भारत जैसे लोकतांत्रिक देश की सबसे बड़ी ताकत उसकी समानता की भावना है, जहां किसी की पहचान उसकी जाति या समुदाय से नहीं, बल्कि उसके व्यक्तित्व और कर्म से होती है।” उन्होंने कहा कि यह विचार और सोच बाबा साहेब के अद्वितीय योगदान से ही संभव हो सकी, जिन्होंने शोषित और वंचित वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
मंत्री ने आगे बताया, “आज़ादी से पहले दलित, शोषित, पीड़ित और वंचित समाज के अंतिम व्यक्ति की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता था, लेकिन बाबा साहेब ने उनके अधिकारों, सम्मान और न्याय के लिए संघर्ष कर उन्हें मुख्यधारा में स्थान दिलाया।” उन्होंने गुरु घासीदास बाबा के “मनखे-मनखे एक समान” के संदेश का भी उल्लेख किया और सामाजिक समरसता की आवश्यकता पर बल दिया।
🎭 सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और बाबा साहेब का योगदान
कार्यक्रम में चिकित्सा महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने नृत्य, गीत और नाट्य मंचन के माध्यम से बाबा साहेब के जीवन और उनके योगदान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी उपस्थित लोगों को बाबा साहेब के महान कार्यों और उनके विचारों के प्रति जागरूक किया।
✊ सामाजिक समरसता का संकल्प
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस अवसर पर सभी उपस्थित लोगों से बाबा साहेब के विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, “अगर हम समाज में समानता, न्याय और सम्मान की भावना को प्रोत्साहित करते हैं, तो ही हम एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकते हैं।”
इस कार्यक्रम ने न केवल बाबा साहेब के योगदान को याद किया, बल्कि यह भी संकल्प लिया गया कि उनके विचारों पर चलकर हम समाज में समानता और समरसता की दिशा में काम करेंगे।
👨⚕️ कार्यक्रम में उपस्थित लोग
कार्यक्रम में चिकित्सा महाविद्यालय और चिकित्सालय के अधिकारी, चिकित्सक, छात्र-छात्राएं और कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। सभी ने बाबा साहेब के समाज सुधारक विचारों को अपनाने और उनके द्वारा किए गए संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।