नकली ORS ड्रिंक्स
डॉ. सिवरंजनी संतोष का इस्तीफा: नकली ORS ड्रिंक्स के खिलाफ खड़ा हुआ बड़ा विवाद
हैदराबाद की प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सिवरंजनी संतोष ने हाल ही में भारतीय बाल चिकित्सा अकादमी (IAP) से इस्तीफा दे दिया है। उनका यह कदम, बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर उनकी लगातार आवाज़ उठाने के बाद सामने आया है। खासतौर पर, डॉ. सिवरंजनी ने जिन नकली ORS ड्रिंक्स का विरोध किया है, वे अब एक बड़े विवाद का हिस्सा बन चुके हैं।
नकली ORS ड्रिंक्स के खिलाफ लंबा संघर्ष
डॉ. सिवरंजनी संतोष पिछले आठ वर्षों से बच्चों के लिए उपयुक्त और सुरक्षित ORS ड्रिंक्स के प्रचार को लेकर सक्रिय रूप से आवाज उठा रही हैं। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कुछ इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक्स जैसे ORSL और ERZL को ORS के रूप में बेचने की प्रथा गलत है, क्योंकि इनमें चीनी और आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का मिश्रण होता है, जो बच्चों की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।
इन उत्पादों में मौजूद sucralose जैसे नॉन-न्यूट्रिटिव स्वीटनर्स का लंबे समय तक इस्तेमाल बच्चों के गट माइक्रोबायोटा पर असर डाल सकता है और मेटाबॉलिक समस्याओं, यहां तक कि डायबिटीज का खतरा भी बढ़ा सकता है।
कानूनी नोटिस और IAP का रुख
हाल ही में, Kenvue कंपनी, जो कि Johnson & Johnson की सहयोगी है और ORSL/ERZL बनाती है, ने डॉ. सिवरंजनी को कानूनी नोटिस भेजा। कंपनी ने आरोप लगाया कि डॉ. सिवरंजनी ने उनके उत्पादों के बारे में गलत और मानहानिकारक टिप्पणियां की हैं, जो उनके व्यापार को नुकसान पहुँचा सकती हैं। इस नोटिस के बाद डॉ. सिवरंजनी ने IAP से इस्तीफा दे दिया, क्योंकि उन्हें संस्था से कोई ठोस समर्थन नहीं मिला।
डॉ. सिवरंजनी का कहना था, “IAP का नेतृत्व Kenvue से मिलने वाले फंड्स पर ज्यादा ध्यान दे रहा है, न कि बच्चों की सुरक्षा पर।” उन्होंने यह भी बताया कि IAP के हालिया ORS स्टेटमेंट में हितों का टकराव स्पष्ट दिखाई दिया।
FSSAI की अहम कार्रवाई
डॉ. सिवरंजनी के आठ साल के संघर्ष के बाद, FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) ने फरवरी 2025 में गैर-WHO मानकों वाले उत्पादों पर ‘ORS’ शब्द का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी। यह एक महत्वपूर्ण कदम था, जो डॉ. सिवरंजनी के लिए बड़ी जीत साबित हुआ।
उन्होंने तेलंगाना हाईकोर्ट में PIL दायर किया था, जिसमें नकली ORS उत्पादों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी। कई डॉक्टर संगठनों और वरिष्ठ चिकित्सकों ने उनका समर्थन किया और इसे ‘डॉक्टरों की आवाज दबाने की कोशिश’ बताया।
डॉ. सिवरंजनी का संदेश
इस्तीफे के बाद डॉ. सिवरंजनी ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए जारी रहेगा। उन्होंने यह चेतावनी दी कि अगर डॉक्टरों की आवाज़ को इस तरह दबाया गया, तो भविष्य में कोई भी डॉक्टर सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर बोलने से डरने लगेगा।
डॉ. सिवरंजनी की यह लड़ाई सिर्फ एक डॉक्टर की नहीं, बल्कि सभी बच्चों के स्वास्थ्य के लिए है। उन्होंने कहा, “यह लड़ाई बच्चों के हक के लिए है और मैं इसे जारी रखूंगी।”