गुजरात के निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बार फिर विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया है। शहरी से ग्रामीण क्षेत्रों तक हर जगह कमल ही कमल खिला। कांग्रेस जहां एक बार फिर मुकाबले में नहीं दिखी तो वहीं आम आदमी पार्टी (आप) कोई खास कमाल तो नहीं कर पाई लेकिन आदिवासी बहुल नर्मदा जिले के गांवों में अरविंद केजरीवाल की झाड़ू ने जरूर चौंका दिया है। हालांकि, इसका क्रेडिट आदिवासी नेता और आप के विधायक चैतर वसावा के व्यक्तिगत प्रभाव को दिया जा रहा है।
डेडियापाड़ा के विधायक चैतर वसावा के प्रभुत्व वाले इलाके में ‘आप’ ने उस जिला पंचायत में जीत हासिल कर ली है जहां भाजपा सरकार ने दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति बनवाई। एक तरफ जहां भाजपा सरकार का दावा है कि सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ की वजह से सामाजिक आर्थिक परिवर्तन हुआ है तो वहीं जनता ने स्थानीय चुनाव में अपना रुख अलग दिखाया। स्टेच्यू ऑफ यूनिटी वाले नर्मदा में भाजपा की हार की तुलना अयोध्या में मिली हार से भी की जा रही है, जहां राम मंदिर के निर्माण के बाद भी पार्टी को पिछले लोकसभा चुनाव में शिकस्त का सामना करना पड़ा था।
‘आप’ ने छह में से चार तालुका पंचायत में जीत हासिल की तो जिला पंचायत की 22 में से 15 सीटों पर कब्जा कर लिया। 2021 में भाजपा ने 22 में से 19 सीटों पर जीत हासिल की थी तो कांग्रेस को दो सीटें मिली थीं। इस बार यहां आप ने शानदार प्रदशन से भाजपा को चौंका दिया है। इसे 37 वर्षीय चैतर वसावा का व्यक्तिगत प्रभाव माना जा रहा है। आदिवासी मुद्दों और अधिकारों को लेकर लगातार संघर्ष करते हुए दिखने वाले वसावा का यहां बड़ा जनाधार है। वह जमीन विवाद, जंगल अधिकारों, स्थानीय प्रशासनिक मुद्दों पर अक्सर जनता के साथ आवाज उठाते दिखते हैं।
पिछले साल चैतर वसावा को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। तब उनपर आरोप लगा था कि उन्होंने पंचायत पदाधिकारी पर जानलेवा हमला किया। वसावा को भले ही कुछ समय तक जेल में रहना पड़ा लेकिन राजनीतिक रूप से यह उनके लिए फायदेमंद रहा। नर्मदा जिले की जीत ‘आप’ को ऐसे समय पर मिली है, जब सूरत में पार्टी को बड़ा झटका लगा है। यहां 27 सीटों से घटकर वह 4 पर ही सिमट गई।
आम आदमी पार्टी को नर्मदा से खुशखबरी ऐसे समय पर मिली है जब दिल्ली में पार्टी के मुखिया चौतरफा परेशानियों से घिरे हुए हैं। पार्टी में हुई सबसे बड़ी टूट के बीच इस जीत से कार्यकर्ताओं का मनोबल जरूर कुछ बढ़ सकता है। टूटफूट के अलावा पार्टी इन दिनों अदालती चक्कर से भी जूझ रही है। पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल जज के खिलाफ ही सत्याग्रह कर रहे हैं।
अपने इलाके में मिली जीत से जहां चैतर वसावा गदगद हैं तो अरविंद केजरीवाल ने भी खुशी जाहिर की है। वसावा ने जीत ने कहा, ‘जनता ने बदलाव, ईमानदारी और विकास की राजनीति पर विश्वास जताया है। यह जीत सिर्फ एक पार्टी की नहीं, बल्कि हर आम नागरीक की उम्मीदों की जीत है। देडियापाड़ा में AAP की ऐतिहासिक जीत।’ वहीं, केजरीवाल ने कहा, ‘बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। डेडियापाड़ा विधानसभा की सभी 11 जिला पंचायत सीटें जीतकर आम आदमी पार्टी ने क्लीन स्वीप कर दिया है। यहाँ पर भाजपा की जीरो सीटें आई हैं।’