रायपुर में विश्व आदिवासी दिवस पर बड़ा मंथन, धर्म कोड और जनगणना में पहचान को लेकर जुटेंगे देशभर के आदिवासी चिंतक

विश्व आदिवासी दिवस

विश्व आदिवासी दिवस पर रायपुर में राष्ट्रीय परिसंवाद, धर्म कोड से लेकर जल-जंगल-जमीन तक मुद्दों पर होगी चर्चा

रायपुर। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक बड़े राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन किया जा रहा है। सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले होने वाले इस आयोजन में देशभर के सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, विधि विशेषज्ञ और जनजातीय समाज से जुड़े प्रतिनिधि शामिल होंगे।

इस राष्ट्रीय परिसंवाद का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, सांस्कृतिक पहचान और भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा करना है। कार्यक्रम में खास तौर पर आदिवासी धर्म कोड, आगामी जनगणना में आदिवासी पहचान दर्ज करने और जल-जंगल-जमीन से जुड़े विषयों पर मंथन किया जाएगा।

धर्म कोड और जनगणना में पहचान पर होगी चर्चा

आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण विषय आदिवासी धर्म कोड और जनगणना में अलग पहचान दर्ज करने का मुद्दा रहेगा।

आदिवासी समाज लंबे समय से अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को स्वतंत्र रूप से दर्ज करने की मांग करता रहा है। परिसंवाद में इस बात पर चर्चा होगी कि जनगणना प्रक्रिया में आदिवासी समुदायों की पहचान को किस तरह स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए।

इस दौरान विशेषज्ञ यह भी विचार करेंगे कि—

  • आदिवासी समुदायों की विशिष्ट पहचान को संवैधानिक स्तर पर कैसे मजबूत किया जाए।
  • जनगणना में सही प्रतिनिधित्व कैसे सुनिश्चित हो।
  • समाज को मिलने वाले संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा कैसे की जाए।

जल-जंगल-जमीन के मुद्दों पर महामंथन

राष्ट्रीय परिसंवाद में आदिवासी समाज के पारंपरिक अधिकारों से जुड़े जल, जंगल और जमीन के मुद्दे भी प्रमुख रहेंगे।

छत्तीसगढ़ सहित देश के कई आदिवासी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों, वन अधिकारों और विकास परियोजनाओं से जुड़े विषय लगातार चर्चा में रहे हैं।

कार्यक्रम में इन विषयों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है—

  • वन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के अधिकार।
  • जंगल आधारित आजीविका की सुरक्षा।
  • विकास कार्यों से होने वाले विस्थापन की चुनौतियां।
  • स्थानीय समुदायों की भागीदारी।

संस्कृति और परंपराओं की दिखेगी झलक

परिसंवाद के दौरान आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को भी विशेष स्थान दिया जाएगा। आयोजन में पारंपरिक लोक नृत्य, गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से जनजातीय विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा।

इसके अलावा एक विशेष आदिवासी फैशन शो का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक पहचान को सामने रखा जाएगा।

आयोजकों का कहना है कि अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहना समाज की एकता और पहचान को मजबूत करता है।

आजीविका और विस्थापन पर भी होगी चर्चा

आदिवासी समाज के सामने मौजूद आजीविका और विस्थापन की चुनौतियां भी परिसंवाद के प्रमुख विषयों में शामिल होंगी।

वन आधारित रोजगार, पारंपरिक संसाधनों पर निर्भरता और बदलते सामाजिक-आर्थिक हालात पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।

आयोजकों के अनुसार, यह कार्यक्रम आदिवासी समाज की आवाज को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का माध्यम बनेगा।

अधिकारों और भविष्य की रणनीति पर बनेगी सहमति

विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित यह राष्ट्रीय परिसंवाद केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज के अधिकारों और भविष्य की दिशा तय करने के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है।

आयोजन के माध्यम से आदिवासी समाज अपनी सांस्कृतिक पहचान, संवैधानिक अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने की तैयारी कर रहा है। रायपुर में होने वाला यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ सहित देशभर के जनजातीय समुदायों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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