सरपंच आंदोलन छत्तीसगढ़
सुशासन तिहार के बीच सरपंचों का विरोध
गरियाबंद में “सुशासन तिहार” कार्यक्रम के बीच क्षेत्र के 53 ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने प्रशासन के खिलाफ धरना प्रदर्शन शुरू किया।
सरपंचों का आरोप है कि पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
धरना प्रदर्शन में क्या मांगा गया
- लंबित विकास कार्यों की जल्द मंजूरी।
- निर्माण कार्यों के लिए जरूरी राशि और सामग्री उपलब्ध कराने की मांग।
- पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं की सुनवाई सुनिश्चित करने की अपील।
सरपंचों का कहना है कि पिछले 18 महीनों से मनरेगा के तहत एक भी पुल-पुलिया या बड़ा निर्माण कार्य स्वीकृत नहीं हुआ।
प्रमुख सरपंचों की प्रतिक्रिया
धरना स्थल पर उपस्थित सरपंचों में शामिल हैं:
- पवन यादव
- तूलेश्वरी माझी
- परमानंद नागेश
- विश्वजीत ठाकुर
- ठुकेलश धुर्वा
- छायासन सोनवानी
इनका कहना है कि पंचायतों द्वारा भेजे गए प्रस्ताव और विकास फाइलें लंबे समय से लंबित हैं। अधिकारियों से चर्चा के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं हुई।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
- सरपंच संघ ने कहा कि अगर आने वाले हफ्ते में पंचायतों के निर्माण कार्यों को स्वीकृति नहीं दी गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
- उनका कहना है कि “सुशासन तिहार” कार्यक्रम का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान करना है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है।