“बस्तर के छिंद से बनी कैफीन-फ्री हर्बल कॉफी: स्थानीय वेस्ट से ग्लोबल बेस्ट की ओर”

हर्बल कॉफी बस्तर


बस्तर का वेस्ट अब बनेगा बेस्ट

रायपुर। बस्तर के नैसर्गिक संसाधनों और समृद्ध जंगलों से एक नई क्रांति जन्म ले रही है। दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी युवा उद्यमी विशाल हालदार ने छिंद (खजूर की एक स्थानीय प्रजाति) के उन बीजों से हर्बल कॉफी तैयार की है, जिन्हें अब तक बस्तर में व्यर्थ समझा जाता था।

विशाल का यह प्रयास न केवल प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग करता है, बल्कि कॉफी के शौकीनों को स्वस्थ और कैफीन-फ्री विकल्प भी देता है।


हर्बल कॉफी की खासियत

  • पूरी तरह कैफीन मुक्त
  • छिंद के प्राकृतिक गुणों से भरपूर एंटीऑक्सीडेंट्स
  • मानसिक सक्रियता और स्वाद दोनों के लिए उपयुक्त
  • ग्रामीणों के लिए आर्थिक अवसर और स्थानीय रोजगार

विशाल का मानना है कि लोग कॉफी केवल मानसिक सक्रियता के लिए नहीं, बल्कि इसके अनूठे स्वाद और आदत के लिए भी पीते हैं। यही सोच इस नवाचार के पीछे है।


इनोवेशन महाकुंभ में मिली पहचान

  • विशाल ने शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय, जगदलपुर में आयोजित इनोवेशन महाकुंभ में अपना स्टॉल लगाया।
  • वित्त मंत्री ओपी चौधरी, विश्वविद्यालय प्रोफेसर और आम जनता ने इसका स्वाद चखा और इसकी खूब सराहना की।
  • इस नवाचार को प्रथम स्थान और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा सम्मान मिला।

युवा उद्यमिता और ग्रामीण विकास

  • विशाल केवल उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं हैं।
  • वे दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के यूथ अप फाउंडेशन के माध्यम से स्थानीय युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
  • उनका उद्देश्य है कि गांव और जंगल से मिलने वाले छिंद के बीजों से ग्रामीणों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो।

भविष्य की संभावनाएँ

  • यह प्रोजेक्ट अभी टेस्टिंग और विकास के दौर में है।
  • आधिकारिक लॉन्च के बाद यह हर्बल कॉफी बस्तर की पहचान बन सकती है।
  • स्वास्थ्य के प्रति जागरूक दुनिया के लिए यह एक अनूठा और स्वस्थ विकल्प साबित हो सकती है।

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