“मुख्यमंत्री ने मैनपाट की बस्ती में पेयजल संकट को तुरंत किया दूर”

पेयजल संकट


छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मैनपाट के चेराजोबला बस्ती में लंबे समय से जारी पेयजल संकट पर तुरंत संज्ञान लिया है। यह कदम राज्य सरकार की जनता तक योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुँचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने आज सुबह समाचार पत्रों का अवलोकन करते समय “नाला और ढोढ़ी के दूषित जल पर आज भी निर्भर हैं वनवासी” शीर्षक से प्रकाशित खबर को गंभीरता से लिया। इसके तुरंत बाद उन्होंने सरगुजा कलेक्टर श्री अजीत वसंत को फोन कर प्रभावित बस्ती में शीघ्र पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री के निर्देशों की मुख्य बातें:

  • चेराजोबला बस्ती में तत्काल स्थलीय निरीक्षण किया जाए।
  • आवश्यकतानुसार हैंडपंप खनन और वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था लागू की जाए।
  • दीर्घकालिक समाधान की दिशा में प्राथमिकता के साथ योजनाएं बनाई जाएं।
  • दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन की योजनाओं का उद्देश्य केवल कागज पर सीमित नहीं रहना चाहिए। उनका लक्ष्य अंतिम व्यक्ति तक वास्तविक लाभ पहुंचाना है। इस दृष्टिकोण से राज्य सरकार बुनियादी सुविधाओं के मामले में विशेष पिछड़ी जनजातियों के निवास क्षेत्रों की नियमित समीक्षा भी कर रही है।

सरकारी दृष्टिकोण और योजनाएं:

  • पेयजल: साफ और सुरक्षित पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • सड़क: दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क सुविधाओं को मजबूत करना।
  • स्वास्थ्य: स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा सुनिश्चित करना।
  • शिक्षा: बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाना।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दूरस्थ और पिछड़े इलाकों के लोग राज्य की योजनाओं का वास्तविक लाभ पाएं, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनका मानना है कि योजनाएं तभी सफल होंगी जब उनका असर जमीन पर नजर आए

यह कदम न केवल मैनपाट की बस्ती में पानी की समस्या का समाधान करेगा, बल्कि राज्य के अन्य दूरस्थ इलाकों में भी शासन की सक्रियता और जवाबदेही का उदाहरण प्रस्तुत करेगा।

छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल यह संदेश देती है कि “जनता की समस्याएं प्राथमिकता हैं, और तुरंत समाधान सरकार की जिम्मेदारी है।”

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