मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना: बेटियों का संबल और सामूहिक विवाह से सामाजिक बदलाव

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ने बेटियों के जीवन में नई खुशियां और परिवारों में राहत लाई, सामूहिक विवाह से सामाजिक समरसता का संदेश।


रायपुर: बेटियों के सम्मान और परिवारों की खुशियों का प्रतीक

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना बेटियों के जीवन में समानता, सम्मान और आत्मनिर्भरता का संदेश लेकर आई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में इस योजना ने गरीब परिवारों की चिंताओं को कम किया और बेटियों के सपनों को नई पहचान दी।


योजना की खासियतें

  • आर्थिक सहायता: प्रत्येक बेटी के विवाह पर अधिकतम 50 हजार रुपये की मदद, जिसमें श्रृंगार और उपहार सामग्री शामिल।
  • सामूहिक विवाह: दहेज जैसी कुरीतियों पर रोक और विवाह को गरिमामय, सादगीपूर्ण बनाया।
  • समावेशी पहल: विधवा, अनाथ और निराश्रित कन्याओं को भी योजना में शामिल किया गया।
  • सांस्कृतिक विविधता: हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध और विशेष पिछड़ी जनजातियों के जोड़े अपने-अपने रीति-रिवाज अनुसार विवाह बंधन में बंधे।

अब तक की उपलब्धियां

  • 24,000+ बेटियों के विवाह संपन्न।
  • वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लक्ष्य: 3,200 विवाह
  • 8 मई 2026 को आयोजित राज्यव्यापी समारोह में 1,385 जोड़े विवाह बंधन में बंधे।
  • 10 फरवरी 2026 में 6,412 जोड़ों के विवाह से गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में छत्तीसगढ़ का नाम दर्ज।

महिला एवं बाल विकास मंत्री की भूमिका

श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सुनिश्चित किया कि प्रत्येक सामूहिक विवाह में गरिमापूर्ण वातावरण, भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था हो। उनका मानना है कि यह योजना केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि बेटियों के सम्मान और सामाजिक समानता का अभियान है।


सुशासन और सामाजिक बदलाव

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ने छत्तीसगढ़ में सुशासन के संवेदनशील और मानवीय चेहरे को पेश किया है। यह न केवल आर्थिक मदद, बल्कि बेटियों को सम्मान, परिवारों को आत्मविश्वास और समाज को सकारात्मक दिशा देने का मॉडल बन चुकी है।

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