करूर भगदड़
तमिलनाडु में करूर भगदड़ का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने इस घटना को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि पुलिस को पहले से पता था कि कार्यक्रम स्थल पर भीड़ लगातार बढ़ रही है और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है, तो समय रहते सभा को रद्द क्यों नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस दुखद घटना का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की गई, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
शुक्रवार को करूर पहुंचे मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि उन्हें उस समय पुलिस पर पूरा भरोसा था। उन्होंने मंच से पुलिस की सराहना भी की थी, लेकिन बाद में उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिली। उनके अनुसार, यदि पुलिस आयोजकों को समय रहते खतरे से आगाह करती और सभा रद्द करने का निर्णय लेती, तो शायद यह दुखद हादसा टाला जा सकता था।
पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि पुलिस ने उन्हें भीड़ की वास्तविक स्थिति से अवगत नहीं कराया। उन्होंने कहा कि पुलिस के पास कार्यक्रम रद्द करने का अधिकार था, लेकिन ऐसा करने के बजाय उन्हें सुरक्षा के साथ कार्यक्रम स्थल से बाहर निकाल दिया गया।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर यह फैसला किसके निर्देश पर लिया गया और इसकी जिम्मेदारी किसकी थी। उनके अनुसार, इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
डीएमके पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री विजय ने बिना किसी का नाम लिए उस समय सत्ता में रही सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस त्रासदी को राजनीतिक मुद्दा बनाकर लाभ लेने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि किसी भी दुखद घटना का इस्तेमाल राजनीति के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि पीड़ित परिवारों को न्याय और सहयोग मिलना चाहिए।
41 पीड़ित परिवारों का किया जिक्र
विजय ने बताया कि 2025 में हुई इस घटना के बाद वह तत्काल करूर जाकर पीड़ित परिवारों से नहीं मिल पाए थे। बाद में सभी 41 प्रभावित परिवारों को चेन्नई के पास बुलाया गया, जहां उन्होंने उनसे मुलाकात कर सांत्वना दी।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों और प्रियजनों को खोया है, उनका दर्द शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता और सरकार उनके साथ खड़ी रहेगी।
करूर में बनेगा स्मारक
करूर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विजय काले कपड़ों में पहुंचे, जिसे उन्होंने शोक का प्रतीक बताया। उन्होंने घोषणा की कि करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में टीवीके की ओर से एक स्मारक बनाया जाएगा।
इसके बाद उन्होंने रोड शो भी किया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने उनका स्वागत किया। उन्होंने हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन किया और पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर
कार्यक्रम से पहले टीवीके के महासचिव एन. आनंद ने बताया था कि केवल क्यूआर कोड वाले पासधारकों को ही प्रवेश दिया जाएगा। करीब 5,000 लोगों की सीमा तय की गई थी और सभी से पुलिस के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई थी।
कांग्रेस सांसद ने भी जताई चिंता
करूर से कांग्रेस सांसद जोतिमणि ने कहा कि जिन 41 परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनका दर्द किसी भी आर्थिक सहायता से कम नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि मृतकों में कई लोग अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे, इसलिए प्रभावित परिवारों को दीर्घकालिक सहायता की आवश्यकता है।
उन्होंने मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर उठाए गए राजनीतिक सवालों का भी जवाब दिया और कहा कि पीड़ित परिवारों की मदद को राजनीति से जोड़ना उचित नहीं है।
मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
करूर भगदड़ अब केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है। मुख्यमंत्री विजय के ताजा बयान के बाद पुलिस की भूमिका, भीड़ प्रबंधन और कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। अब इस मामले की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।