अवैध मुरुम उत्खनन
नकपुरा गांव में अवैध मुरुम उत्खनन: रात-दिन जारी धमाका
आरंग ब्लॉक के नकपुरा गांव में अवैध मुरुम उत्खनन का खेल दिन-ब-दिन फल-फूल रहा है। गांव के सरपंच, सचिव और पंचों की मिलीभगत से साईं ट्रेडर्स का कारोबार खनिज नाका के पास तेज़ी से बढ़ रहा है। यही नहीं, यह उत्खनन 24 घंटे लगातार जारी है, जिससे न सिर्फ शासन को राजस्व की भारी क्षति हो रही है, बल्कि स्थानीय पर्यावरण और सड़क सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।
मुख्य तथ्य:
- साईं ट्रेडर्स द्वारा सरकारी नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
- खनिज विभाग की मिलीभगत से अवैध उत्खनन तेज़ी से होता है।
- शिकायत मिलने पर विभाग की टीम के आने से पहले ही सारा सामान और सबूत हटा दिए जाते हैं।
- कानूनी कार्रवाई के बावजूद उत्खनन फिर से शुरू हो जाता है।
गांव वालों की शिकायत:
गांववासियों का कहना है कि नकपुरा गांव में यह गतिविधि लंबे समय से चल रही है। कई बार प्रशासन और खनिज विभाग को सूचित करने के बावजूद कोई स्थायी कार्रवाई नहीं होती। शिकायत मिलने पर विभाग की टीम केवल निरीक्षण करने आती है और बिना किसी कार्रवाई के लौट जाती है।
अवैध मुरुम उत्खनन के प्रभाव:
- स्थानीय पर्यावरण को नुकसान: मिट्टी की कटाई से जमीन की उर्वरता घट रही है।
- सड़क और सुरक्षा खतरा: भारी वाहनों की वजह से सड़कें टूट रही हैं और दुर्घटना का खतरा बढ़ रहा है।
- आर्थिक नुकसान: राज्य सरकार को राजस्व की बड़ी मात्रा में हानि हो रही है।
- सामाजिक असंतोष: गांववासियों में प्रशासन और अधिकारियों पर विश्वास कम हो रहा है।
क्या किया जा सकता है?
- स्थानीय प्रशासन और पुलिस को सक्रिय निगरानी बढ़ानी होगी।
- खनिज विभाग के कर्मचारियों की जवाबदेही तय करनी होगी।
- गांववासियों को जागरूक करना और शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित करना।
- तकनीकी निगरानी जैसे ड्रोन और GPS ट्रैकिंग का इस्तेमाल करना।