“आईटीआई में छात्रों से कराया जा रहा निर्माण कार्य, हादसे में छात्र की 5 उंगलियां कटीं – प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल”

आईटीआई हादसा


लेख:

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के डौंडीलोहारा स्थित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में शिक्षा की बजाय मजदूरी के कार्यों में छात्रों को लगाए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह घटना न सिर्फ संस्थान की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि विद्यार्थियों के सुरक्षा और अधिकारों की गंभीर उल्लंघन का भी पर्दाफाश करती है।

1. पढ़ाई के बजाय मजदूरी का काम

आईटीआई में छात्रों को आमतौर पर तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा दी जाती है, लेकिन इस संस्थान में हालात पूरी तरह अलग हैं। यहां छात्रों से बाथरूम निर्माण, ईंट ढुलाई, प्लास्टर का काम, और अन्य निर्माण कार्य करवाए जा रहे थे। यह कार्य छात्रों के पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं थे और न ही उन्हें इस तरह के शारीरिक श्रम में लगाना कानूनी रूप से उचित है।

मुख्य आरोप:

  • छात्रों से शिक्षा की बजाय श्रम कार्य कराया जा रहा था।
  • निर्माण कार्य में छात्रों को बिना सुरक्षा उपायों के लगाया गया था।
  • छात्रों का शोषण और उनके अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा था।

2. भयावह हादसा: पांच उंगलियां कटीं

इसी निर्माण कार्य के दौरान एक गंभीर हादसा हुआ, जब टाकेश्वर कुमार, जो फिटर ट्रेड का छात्र है, ईंट ढोने के कार्य में जुटा था। अचानक उसका संतुलन बिगड़ा और उसका हाथ ईंट ढोने वाले उपकरण में फंस गया। इससे उसके दोनों हाथों की पांच उंगलियां कट गईं। यह घटना इतनी भयावह थी कि मौके पर मौजूद अन्य छात्र सकते में आ गए और तुरंत उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

दर्दनाक हादसे के बाद:

  • छात्र की गंभीर चोटों को देखकर अन्य छात्र सहम गए।
  • उसे तत्काल इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया, लेकिन उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।

3. संस्थान प्रबंधन पर गंभीर सवाल

यह घटना सिर्फ एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह संस्था की पूरी शिक्षा व्यवस्था और प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाती है। क्या यह संस्थान छात्रों को उनकी शिक्षा देने के बजाय श्रम के कार्यों में लगाया जा रहा था? क्या प्रबंधन ने छात्रों की सुरक्षा और कल्याण के बारे में कभी सोचा? इन सवालों का जवाब खोजना अब आवश्यक हो गया है।

  • प्रबंधन की लापरवाही: क्या छात्रों के शारीरिक और मानसिक कल्याण की देखभाल संस्थान द्वारा की जा रही है?
  • निर्माण कार्यों की अनुमति: छात्रों से निर्माण कार्य कराना, क्या यह उनके अधिकारों का उल्लंघन नहीं है?
  • सुरक्षा उपायों की कमी: क्या छात्रों को आवश्यक सुरक्षा उपकरणों और गाइडलाइन्स की जानकारी दी गई थी?

4. स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों की भूमिका

अब यह सवाल उठता है कि इस तरह के शोषण और दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार कौन है? क्या स्थानीय प्रशासन और शैक्षिक अधिकारी इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार न हो?

संभावित कदम:

  • जांच: संबंधित अधिकारियों द्वारा घटना की जांच की जानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
  • संस्थान की जिम्मेदारी: संस्थान को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्रों को उनके पाठ्यक्रम के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाए, न कि शारीरिक श्रम के कार्य में लगाया जाए।

5. छात्रों के अधिकार और सुरक्षा

यह घटना हमें याद दिलाती है कि शिक्षा के अधिकार के साथ-साथ विद्यार्थियों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। संस्थानों को छात्रों को सुरक्षित वातावरण और उचित शिक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी होती है। यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि ऐसे शैक्षिक संस्थान, जो अपने मुख्य उद्देश्य से भटक कर छात्रों से श्रम कार्य करवाते हैं, उन्हें सही दिशा में आना चाहिए।

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