बिजली के झटके, बेरहमी से पिटाई; भारतीय बच्चों को टॉर्चर कर रहे म्यांमार में साइबर फ्रॉड सेंटर

म्यांमार में साइबर फ्रॉड सेंटर में फंसे भारतीयों को टॉर्चर किए जाने का मामला सामने आया है। हालांकि, भारतीय अधिकारी लगातार इन सेंटर्स में फंसे नागरिकों की मुल्क वापसी की कोशिशें कर रहे हैं। खबर है कि एक भारतीय युवक को बेरहमी से पीटा गया था और बिजली के झटके दिए गए थे। कहा जा रहा है कि इन सेंटर्स के संचालन के तार चीनी नागरिकों से जुड़े हैं, जिसमें म्यांमार के नागरिक मदद कर रहे हैं।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 8 महीने पहले उत्तर प्रदेश के लखनऊ का 22 वर्षीय अजय नौकरी के लिए विदेश गया था। उसे मलेशिया से कॉल सेंटर में काम करने का ऑफर आया था, लेकिन उसे म्यांमार के फ्रॉड सेंटर में फंसा दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, उसके दो दोस्त किसी तरह भारत वापस आ चुके हैं। वहीं, अजय के गरीब माता-पिता लगातार उसकी रिहाई की मांग कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, जेपार्क नाम का कॉल सेंटर मेघालापो में है। अखबार से बातचीत में भारत लौटे एक शख्स राहुल ने बताया, ‘6 लड़के हैं, जिन्हें सेंटर में रखा गया था। जबकि, डॉन्गमे नाम के सेंटर में भेजे गए हम 72 लोग भारत आने में सफल रहे। मैंने सुना है कि अजय को टॉर्चर किया जा रहा है और अंधेरे कमरे में रखा जा रहा है, उसे बिजली के झटके दे रहे हैं और भोजन नहीं दे रहे। मैं चाहता हूं कि वह सुरक्षित वापस लौट आए।’

सितंबर में भारत लौटे राहुल जब भारत लौटे, तब डेंगू से जूझ रहे थे। अखबार से बातचीत में अजय के रिश्तेदार राम जनम ने कहा, ‘उसे बेरहमी से पीटा जा रहा है, अंधेरे कमरे में रख रहे हैं और बिजली के झटके दे रहे हैं। जब से हमें पता चला है कि वह फंस गया है, तब से ही हम संबंधित अधिकारियों को लिख रहे हैं, लेकिन अब तक सब व्यर्थ रहा है। उसके बूढे़ माता पिता उससे मिलने का इंतजार कर रहे हैं और जानकारी नहीं है कि वह किस दौर से गुजर रहा है।’

रिपोर्ट के अनुसार, वापस लौटे लड़के ने बताया है कि ये चीनी नागरिक इन कॉल सेंटर को अवैध तरीके से चला रहे हैं। उन्होंने बताया है कि इस काम में म्यांमार की स्थानीय जनता उनका साथ दे रही है, ताकि वह वापस न लौट सकें। खबर है कि कई देशों के लड़के लड़कियां ऐसे कॉल सेंटर के चंगुल में फंस चुके हैं।

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