प्रयागराज में खाकी के एकतरफा झुकाव से भड़के डॉक्टर! ठप होगी पूरी स्वास्थ्य सेवा, महा-संग्राम का ऐलान

संगम नगरी प्रयागराज में इस समय गंगा-यमुना की लहरों से ज्यादा तेज हलचल चिकित्सा जगत में देखने को मिल रही है। शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल (SRN) में शुरू हुआ एक विवाद अब पूरे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गले की फांस बन गया है। सफेद कोट पहनकर लोगों की जान बचाने वाले डॉक्टर अब सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, इसका कारण न्याय की मांग है।

शुक्रवार की सुबह से शहर में इलाज मिलना मुश्किल हो सकता है क्योंकि डॉक्टरों ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए ‘काम बंद’ का बिगुल फूंक दिया है। जानिए पूरा मामला क्या है-

पूरेमामले की जड़ स्वरूपरानी अस्पताल में हुए उस हंगामे में छिपी है जहां जूनियर डॉक्टरों और मरीज के पक्ष से जुड़े लोगों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस मारपीट के बाद माहौल तब और बिगड़ गया जब पुलिस ने मामले में सक्रियता दिखाते हुए डॉक्टरों के खिलाफ तो एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली, लेकिन दूसरे पक्ष पर चुप्पी साध ली। डॉक्टरों का सीधा आरोप है कि पुलिस का यह रवैया पूरी तरह से भेदभावपूर्ण है। जब संघर्ष में दो पक्ष शामिल थे, तो कार्रवाई केवल एक तरफ ही क्यों हुई? इसी ‘एकतरफा’ इंसाफ ने डॉक्टरों के भीतर असुरक्षा और गुस्से की भावना को जन्म दिया है, जो अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है।

इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन की एक आपातकालीन बैठक में डॉक्टरों ने दो-टूक शब्दों में अपनी नाराजगी व्यक्त की है। डॉक्टर ए.के. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि चिकित्सा जगत इस तरह की अराजकता और प्रशासनिक दबाव को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने अपनी शिकायत पुलिस को दी थी, लेकिन उस पर अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। यह केवल एक अस्पताल का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह गरिमा और निष्पक्षता की लड़ाई बन गई है। डॉक्टरों की मांग बहुत सरल है- मामले की निष्पक्ष जांच हो और जो भी पक्ष दोषी हो, उसके खिलाफ समान रूप से कानूनी कार्रवाई की जाए।, प्रशासन की ओर से मिल रहे केवल आश्वासनों ने आग में घी डालने का काम किया है।

डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को शुक्रवार सुबह 8 बजे तक का कड़ा अल्टीमेटम दिया है।, यदि तब तक डॉक्टरों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की जाती, तो पूरे जिले में 24 घंटे की सांकेतिक हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। इस हड़ताल की सबसे डरावनी बात यह है कि इसमें केवल सरकारी अस्पताल ही नहीं, बल्कि निजी अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटर भी शामिल होने जा रहे हैं। डॉक्टर कमल सिंह के अनुसार, इस कदम से प्रयागराज की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है, जिससे हजारों मरीजों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। यह स्थिति केवल प्रयागराज तक सीमित नहीं रहेगी; डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो यह चिंगारी पूरे उत्तर प्रदेश में फैल सकती है।

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