डोनाल्ड ट्रंप ने बुलाए पंडित जी, व्हाइट हाउस में कराया वैदिक मंत्रों का पाठ?

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी 2025 को अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे, लेकिन इसके पहले ही ट्रंप संग एक मंदिर के पुजारी की चार साल पुरानी तस्वीर को हाल का बताकर झूठे दावे के साथ वायरल कर दिया गया। चुनावी नतीजों के बाद इस तस्वीर को साझा करके यह दावा किया जा रहा है कि ट्रंप के आमंत्रण पर न्यू जर्सी के बी.ए.पी.एस श्री स्वामीनारायण मंदिर के पुजारी हरीश ब्रह्मभट्ट ने व्हाइट हाउस में वैदिक मंत्रों का पाठ किया।

‘पीटीआई फैक्ट चेक डेस्क’ की जांच में वायरल पोस्ट भ्रामक निकला। जांच में पता चला कि वायरल तस्वीर राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद की नहीं बल्कि मई 2020 की है। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस समय ‘नेशनल डे ऑफ प्रेयर’ के मौके पर श्री स्वामी नारायण मंदिर के पुजारी हरीश ब्रह्मभट्ट को प्रार्थना करने के लिए बुलाया था।

सोशल मीडिया मंच फेसबुक पर ‘अवधेश निषाद गुड्डू’ नामक एक यूजर ने नौ नवंबर को वायरल तस्वीर को साझा करते हुए लिखा, ‘पंडित हरीश ब्रह्मभट्ट जी व्हाइट हाउस में वैदिक मंत्र का पाठ करते हुए। डोनाल्ड ट्रंप के आमंत्रण पर। यह है भारत और सनातन की ताकत।’ इस तरह के कई पोस्ट फेसबुक सहित विभिन्न सोशल मीडिया मंच पर काफी वायरल हो रहे हैं।

दावे की पुष्टि के लिए डेस्क ने सबसे पहले वायरल तस्वीर को गूगल लेंस के जरिए रिवर्स सर्च किया। पता चला कि यह तस्वीर करीब चार साल पुरानी है।

फेसबुक पर मई 2020 में कुछ उपयोगकर्ताओं ने इस तस्वीर को साझा करते हुए लिखा, ‘अमेरिका में ‘नेशनल प्रेयर डे’ के अवसर पर लोगों के स्वास्थ्य और सलामती के लिए व्हाइट हाउस में न्यू जर्सी के बी.ए.पी.एस स्वामीनारायण मंदिर के पुजारी हरीश ब्रह्मभट्ट ने शांति पाठ कराया। रोज गार्डन में हुए इस वैदिक शांति पाठ में कोरोना महामारी से प्रभावित लोगों की कुशलता की प्रार्थना की गई।’

जांच के दौरान यह तस्वीर फोटो स्टॉक वेबसाइट ‘फ्लिकर’ और ‘अलामी’ पर भी मिली। इसमें बताया गया कि यह तस्वीर 7 मई 2020 को व्हाइट हाउस में श्री स्वामीनारायण मंदिर के पुजारी हरीश ब्रह्मभट्ट द्वारा करवाए गए शांति पाठ के दौरान की है।

इसके अलावा तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी आठ मई 2020 को अपने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर ‘नेशनल डे ऑफ प्रेयर’ का एक वीडियो क्लिप साझा किया था, जिसमें विभिन्न धर्मगुरुओं के साथ हरीश ब्रह्मभट्ट भी नजर आ रहे थे।

हमारी अब तक की जांच से यह साफ है कि वायरल तस्वीर राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों के ऐलान के बाद की नहीं, बल्कि मई 2020 की है। हमारी पड़ताल में वायरल सोशल मीडिया पोस्ट भ्रामक पाई गई।

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