फ्यूल राशनिंग
फ्यूल राशनिंग क्या है?
सरल शब्दों में, फ्यूल राशनिंग वह सिस्टम है जिसमें सरकार तय करती है कि आप अपनी मर्जी से जितना चाहें उतना पेट्रोल या डीजल नहीं खरीद सकते। हर नागरिक या वाहन के लिए एक कोटा तय होता है।
- तय समय सीमा में (जैसे हफ्ते में) केवल उतना ही ईंधन खरीद पाएंगे।
- खरीद के लिए QR कोड, कूपन या वाहन नंबर के आधार पर ऑड-ईवन सिस्टम लागू किया जा सकता है।
दुनिया के देशों में लागू कोटा
हालिया तेल संकट के कारण कई देशों ने पहले ही फ्यूल राशनिंग लागू कर दी है:
- श्रीलंका: कारों को हफ्ते में 15-25 लीटर, मोटरसाइकिल को 5 लीटर पेट्रोल।
- पाकिस्तान: एक बार में केवल 5 लीटर तेल, सरकारी कर्मचारियों के लिए हफ्ते में केवल 4 दिन ऑफिस।
- फ्रांस और जर्मनी: QR कोड के जरिए हफ्ते में 10-20 लीटर पेट्रोल की सीमा।
- बांग्लादेश और म्यांमार: स्कूल ऑनलाइन और ऑड-ईवन सिस्टम से ईंधन।
- स्लोवेनिया और केन्या: हफ्ते में 50 लीटर कोटा, तेल निर्यात पर पाबंदी।
भारत में स्थिति
- कुछ शहरों में पेट्रोल पंप संचालक पहले ही अपनी तरफ से कोटा सिस्टम लागू कर चुके हैं।
- बाइक वालों को 200 रुपये तक
- कार वालों को 2,000 रुपये तक तेल मिल रहा है।
- इसके कारण लोग अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराने में भी असमर्थ हो रहे हैं।
ईंधन बचाने के उपाय
- वर्क फ्रॉम होम और 4-डेज वर्किंग: पाकिस्तान, लाओस और फिलीपींस में सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू।
- कार-लेस-डे: न्यूजीलैंड में हफ्ते में एक दिन गाड़ी न चलाने का विचार।
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट: वियतनाम और कंबोडिया में बस, मेट्रो और कारपूलिंग को बढ़ावा।
भारत के लिए क्या संकेत?
- अभी भारत में औपचारिक राशनिंग लागू नहीं हुई है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईंधन और यात्रा में कटौती की अपील की है।
- विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर मध्य पूर्व संकट लंबा खिंचता है, तो भारत में भी कोटा सिस्टम या QR कोड आधारित खरीद लागू हो सकती है।