NEET पेपर लीक
NEET पेपर लीक का मामला
NEET UG 2026 के पेपर लीक मामले ने देशभर के छात्रों और अभिभावकों को झकझोर दिया है।
- पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रश्नपत्र की एक प्रति नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से लीक होकर गुरुग्राम के डॉक्टर तक पहुंची।
- मामला अभी जांच के अधीन है।
- NEET पेपर लीक सिर्फ छात्रों के भविष्य को खतरे में नहीं डालता, बल्कि अपराधियों के लिए करोड़ों रुपये कमाने का साधन भी बनता है।
पेपर लीक का काला धंधा कैसे काम करता है
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह धंधा चार स्तरों में काम करता है:
1️⃣ मास्टर सॉल्वर / प्राइमरी सोर्स
- प्रिंटिंग प्रेस, ट्रांसपोर्ट और ट्रेजरी तक पहुंच।
- पेपर थोक में 5 से 10 करोड़ रुपये में बेचते हैं।
- लेन-देन शेल अकाउंट और क्रिप्टो वॉलेट के माध्यम से किया जाता है।
2️⃣ क्षेत्रीय बिचौलिए
- परीक्षा से 2-3 दिन पहले बड़े क्लाइंट्स को पेपर बेचते हैं।
- प्रति अभ्यर्थी 15 से 30 लाख रुपये में।
- इसमें सेफ हाउस का खर्च शामिल।
- 50 लाख में खरीदी गई एक कॉपी से 500% मुनाफा।
3️⃣ लोकल एजेंट और सॉल्वर
- एमबीबीएस छात्रों या रिसर्च स्कॉलर्स को रखा जाता है।
- पेपर हल करने वाले को हर सेशन में 2-5 लाख रुपये मिलते हैं।
- मिनटों में पेपर हल करके एजेंट्स को सौंपा जाता है।
4️⃣ ब्रोकर
- अंतिम स्तर के खिलाड़ी।
- पेपर एक रात पहले टेलीग्राम या सोशल प्लेटफॉर्म्स पर हजारों रुपये में बिकते हैं।
- एक ही रात में लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं।
करोड़ों का पेपर कैसे सस्ते में बिकता है
- थोक में करोड़ों रुपये में शुरू हुआ पेपर 25,000–50,000 रुपये में बिक जाता है।
- अंतिम स्तर के ब्रोकर इसे सैकड़ों छात्रों को बेच देते हैं।
- अपराधियों के लिए यह असली मुनाफा रातों-रात होता है।
कार्रवाई और स्थिति
- पुलिस ने गुरुग्राम के एक डॉक्टर की संलिप्तता की खबरों की पुष्टि नहीं की है।
- इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के अनुसार, अभी तक कोई आधिकारिक जांच संपर्क नहीं हुआ।
- मामला अभी जांच के अधीन है और किसी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी।