“बिहान योजना से बनी आत्मनिर्भर: श्रीमती अर्चना सिंह की प्रेरणादायक सफलता कहानी”

बिहान योजना


छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी बिहान योजना आज ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का एक मजबूत माध्यम बन चुकी है। इस योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविरों के साथ-साथ “मेरी कहानी, मेरी जुबानी” पहल महिलाओं की प्रेरणादायक सफलताओं को उजागर कर रही है।

अर्चना सिंह की कहानी:

बलरामपुर जिले के ग्राम पचावल की श्रीमती अर्चना सिंह ने बिहान योजना के तहत स्व-सहायता समूह से जुड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की। उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें विभिन्न प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्राप्त हुए, जिससे उनका आत्मविश्वास और उद्यमिता कौशल मजबूत हुआ।

  • स्व-सहायता समूह से जुड़कर उन्हें 2 लाख रुपये का ऋण मिला।
  • इस ऋण के माध्यम से उन्होंने राइस मिल की स्थापना की।
  • वर्तमान में वे सफलतापूर्वक राइस मिल का संचालन कर रही हैं।
  • नियमित आय से उनका परिवारिक आर्थिक स्तर सुदृढ़ हुआ।

श्रीमती अर्चना बताती हैं कि पहले उनका जीवन सीमित संसाधनों में चल रहा था, लेकिन बिहान योजना से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया। उन्होंने न केवल खुद आत्मनिर्भरता हासिल की, बल्कि अपने क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित किया।

बिहान योजना के फायदे:

  • ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक स्वतंत्रता
  • प्रशिक्षण और कौशल विकास के माध्यम से व्यवसायिक क्षमता का निर्माण
  • छोटे ऋण और सहायता के जरिए स्वरोजगार के अवसर
  • समुदाय में महिलाओं की भागीदारी और सामाजिक सम्मान में वृद्धि।

श्रीमती अर्चना सिंह की कहानी यह साबित करती है कि सही अवसर और समर्थन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने जीवन में बड़ी सफलता हासिल कर सकती हैं। बिहान योजना केवल आर्थिक सहायता ही नहीं देती, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व और उद्यमिता की भावना भी विकसित करती है।

इस पहल से न केवल महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलता है, बल्कि पूरे समुदाय में सकारात्मक बदलाव और प्रेरणा फैलती है। ऐसी कहानियां यह संदेश देती हैं कि सशक्त महिला = सशक्त समाज

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