देश में एक केंद्र शासित प्रदेश सहित 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुका है। लोग अब 4 मई का इंतजार कर रहे हैं। 4 मई को इन विधानसभा चुनावों की मतगणना होगी। उसके बाद नई सरकार का गठन होगा। इस बीच खबर आ रही है कि देश में कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों के मंहगे होने के बाद आम जन को एक और झटका लगने वाला है। विधानसभा चुनावों के संपन्न होने के बाद कई मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि देश में डीजल-पेट्रोल की कीमतों में भारी बढ़ोत्तरी हो सकती है।
यह खबर आने के बाद आम आदमी की रातों की नींद उड़ गई है। ईरान-अमेरिका और इजरायल संघर्ष के दौरान देश में घरेलू गैस को लेकर लोग काफी परेशान हुए थे। ऐसे में अब डीजल-पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोत्तरी की खबर लोगों को परेशान करने लगी है।
4-5 रु. बढ़ोत्तरी की संभावना
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल कंपनियां घाटे में चल रही हैं। इसको देखते हुए सरकार ईंधन की कीमतों में संशोधन को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, डीजल और पेट्रोल की कीमतों में 4 से 5 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से बढ़ोत्तरी हो सकती है। तेल कीमतों में बढ़ोत्तरी का सीधा असर रोड ट्रांसपोर्ट पर पड़ेगा। इससे सब्जी, दूध जैसी दैनिक उपयोग वाली चीजें मंहगी है सकती हैं।
‘पेट्रोल, डीजल, सब होंगे महंगे’
इसके पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस लीडर राहुल गांधी ने महंगाई को लेकर ट्वीट किया था। जिसमें उन्होंने दावा किया था कि चुनावी राहत खत्म, महंगाई की गर्मी तैयार। 29 अप्रैल के बाद देखिए।
पेट्रोल, डीजल, सब महंगे होंगे। जब तेल सस्ता था, मोदी सरकार ने अपना मुनाफा रखा। अब महंगा है, तो बोझ आप पर डालेगी। सस्ते की लूट मचाती सरकार – जनता को बस महंगाई की मार।
पेट्रोल-डीजल में कीमत बढ़ोत्तरी की खबरों के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी ने शुक्रवार को बयान जारी कर कहा था कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को 4 साल 60 दिनों तक स्थिर बनाए रखा है। आगे उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य युद्ध, सप्लाई चेन में रुकावट और भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित रहा है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट का तनाव भी शामिल है। इसके बावजूद देश में स्थिरता बनी रही।
उनके अनुसार, देश में खुदरा ईंधन कीमतों में 4 साल 60 दिनों से बढ़ोतरी नहीं की गई है। जबकि, पड़ोसी देशों में ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। कुछ जगहों पर 39 से 66 फीसदी तक बढ़ोत्तरी रही। वहां ईंधन की कमी, राशनिंग और कामकाज के सीमित घंटों जैसी समस्याएं भी देखने को मिलीं।